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एक ही बिंदु पर दो बार सजा मामले में सुनवाई अधूरी

खण्डपीठ ने वृहद्पीठ को भेजी थी चिकित्सक की याचिका
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Hearing incomplete on twice sentence at the same point

एक ही बिंदु पर दो बार सजा मामले में सुनवाई अधूरी

जोधपुर

राजस्थान हाईकोर्ट में डॉ. दलपतसिंह राजपुरोहित की याचिका एक विधिक बिन्दू तय करने के लिए बुधवार को वृहद् पीठ का गठन कर सुनवाई की गई। समयाभाव के चलते पूरी नही हो पाई। अगली सुनवाई 1 दिसम्बर को होगी।

खंडपीठ ने विधिक बिन्दू को तय करने के लिए इस याचिका को वृहद् पीठ के समक्ष भेजा था। वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढा, पीके लोहरा और न्यायाधीश दिनेश मेहता की वृहद् पीठ सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एमएस सिंघवी ने पूर्व के कई निर्णय पेश किए।

मामले के अनुसार राज्य सरकार ने सेवाकाल के दौरान तीन संतान होने के कारण चिकित्सा विभाग में कार्यरत डॉ. राजपुरोहित की वेतनवृद्धि रोक दी थी। इसी बीच मेडिकल कॉलेज में सहायक प्रोफेसर पद के लिए विज्ञप्ति जारी हुई तो डॉ. राजपुरोहित ने आवेदन किया। लेकिन उनके आवेदन को निरस्त कर दिया गया क्योंकि उनके तीन संतानें थी।

इस पर डॉ. राजपुरोहित ने हाईकोर्ट में याचिका पेश कर कहा कि क्या एक ही बिन्दू पर दो बार सजा हो सकती है? जब तीन संतान की वजह से सरकार ने उनकी वेतनवृद्धि रोक दी तो सहायक प्रोफेसर पद के लिए आवेदन निरस्त नहीं कर सकती।

पहले से कोई नजीर मौजूद नहीं होने के चलते खण्डपीठ ने याचिका वृहद पीठ को भेज दी थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार व उनके सहयोगी भी मौजूद थे।