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जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने मंगलवार को करीब एक दशक पूर्व 216 युवाओं को अकाल मृत्यु का ग्रास बनाने वाले मेहरानगढ़ हादसे पर गठित जस्टिस चौपड़ा आयोग की रिपोर्ट दिए किए जाने के छह माह में एक्ट के नियमानुसार विधानसभा में रिपोर्ट पेश नहीं करने पर नाराजगी जताते हुए सरकार को फटकार लगाई। जस्टिस संगीत लोढा व जस्टिस दिनेश मेहता की खंडपीठ में सुनवाई के दौरान महाअधिवक्ता एनएम लोढा ने कहा कि नियमानुसार आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक करना आवश्यक नहीं है। यह बात याचिकाकर्ता ने भी मानी है। इस पर खंडपीठ ने कहा कि कमीशन ऑफ इन्क्वायरी एक्ट 1952 के सेक्शन 3 के तहत जस्टिस जसराज चोपड़ा आयोग का गठन किया गया था। जिसके अनुसार जांच रिपोर्ट पेश करने के छह माह के अंदर सरकार को अनिवार्य रूप से विधानसभा में रिपोर्ट पेश करनी होती है।
वर्ष 2008 में हुए हादसे पर आयोग ने वर्ष 2011 में रिपोर्ट पेश कर दी तो सरकार ने रिपोर्ट पेश करने के बाद इतने साल तक क्या किया? उन्होंने कहा कि जहां तक कोर्ट के आदेश का सवाल है पिछले आदेश में साफ-साफ लिखा है कि 31 जुलाई तक आयोग की रिपोर्ट पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश कर दें, अन्यथा हाईकोर्ट आयोग की रिपोर्ट कोर्ट में मंगवाने के आदेश दे सकता है। क्या इस तरह के आदेश जारी किए जाएं? इस पर महाअधिवक्ता ने कहा कि केबिनेट सब कमेटी ने रिपोर्ट को एग्जामिन कर लिया है तथा अब केबिनेट इस पर विचार कर अपना मत प्रकट करेगी। लेकिन ऐसे मामलों में फाइंडिंग्स को सार्वजनिक करना आवश्यक नहीं होता। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 4 अक्टूबर को तय करते हुए याचिकाकर्ता मानाराम की ओर से पेश जनहित याचिका की सुनवाई स्थगित कर दी।
याचिकाकर्ता ने किया विरोध
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विजय मेहता ने और ज्यादा समय दिए जाने पर विरोध जताते हुए कहा कि वर्तमान सरकार टालमटोल की नीति अपनाते हुए बार-बार समय मांग रही है। ताकि तब तक सरकार बदल जाए और उन पर आयोग की रिपोर्ट पर एक्शन लेने का दबाव नहीं आए। इस पर खंडपीठ ने कहा कि सरकार की ओर से महाअधिवक्ता कुछ भी कहें, उनको सुनना तो पडेग़ा, आखिर वे महाअधिवक्ता हैं, क्या पता कोई ऐसा बिंदु बताएं जिसके बारे में कोर्ट को पता ही ना हो। इसलिए मामले को 4 अक्टूबर तक के लिए स्थगित किया जाता है। सरकार की ओर से महाअधिवक्ता लोढा के अलावा एएजी पीआर सिंह व वासुदेव दाधीच भी मौजूद रहे।
Published on:
26 Sept 2018 11:46 am
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