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प्रदेश के अस्पतालों के हाल पर कोर्ट की टिप्पणी, कहा क्यूं नहीं अधिकारियों का इलाज सरकारी अस्पतालों में जरूरी कर दिया जाए

कोर्ट में मेडिकल व पेरामेडिकल स्टॉफ की जानकारी पेश की जानी थी लेकिन उसके लिए सरकार की ओर से समय मांगा गया।
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जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट में जस्टिस संदीप मेहता व जस्टिस विनीत माथुर की खंडपीठ में सोमवार को सरकारी अस्पतालों में स्टॉफ की कमी व अस्पतालों की दशा को लेकर सिरोही के पूर्व विधायक संयम लोढा की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता श्याम सुदंर लादरेचा ने कोर्ट के समक्ष कहा कि पूर्व के आदेशों की पालना कर दी गई है, अब सरकारी अस्पतालों में व्यवस्था पहले से बेहतर है और सब कुछ ठीक ठाक चल रहा है। इस पर कोर्ट ने मौखिक रूप से पूछा कि क्यों नहीं सभी सरकारी अधिकारियो के लिए सरकारी अस्पताल में इलाज करवाना अनिवार्य कर दिया जाए। लादरेचा ने कहा कि यह नियम तो पहले से है। सरकारी अस्पताल की एनओसी के बाद ही सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों का निजी अस्पताल में उपचार हो सकता है। कोर्ट में मेडिकल व पेरामेडिकल स्टॉफ की जानकारी पेश की जानी थी लेकिन उसके लिए सरकार की ओर से समय मांगा गया। इस पर कोर्ट ने सरकार को चार सप्ताह का समय दिया है।