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मेहरानगढ़ दुखांतिका : चौपड़ा आयोग की रिपोर्ट सदन में रखने की वैधानिकता देखेगा हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट परीक्षण करेगा कि मेहरानगढ़ दुखांतिका की जांच के लिए गठित जस्टिस जसराज चौपड़ा आयोग की रिपोर्ट विधानसभा के पटल पर रखा जाना विधिक दायित्व के अधीन है या नहीं। इस मामले में 27 नवंबर को होने वाली सुनवाई के दौरान विधिक प्रावधानों पर बहस होगी।
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highcourt news

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जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट परीक्षण करेगा कि मेहरानगढ़ दुखांतिका की जांच के लिए गठित जस्टिस जसराज चौपड़ा आयोग की रिपोर्ट विधानसभा के पटल पर रखा जाना विधिक दायित्व के अधीन है या नहीं। इस मामले में 27 नवंबर को होने वाली सुनवाई के दौरान विधिक प्रावधानों पर बहस होगी।

राज्य सरकार ने आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की समीक्षा के लिए गठित दो कैबिनेट सब कमेटी के निष्कर्षों को सीलबंद लिफाफे में राजस्थान हाईकोर्ट में पेश किया था। सरकार ने आयोग की रिपोर्ट भी पेश करनी चाही थी, जिसे पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने यह कहते हुए स्वीकार नहीं किया था कि कैबिनेट सब कमेटी के निष्कर्षों का अवलोकन करने के बाद उचित समझे जाने पर रिपोर्ट मांगी जाएगी।

वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा और न्यायाधीश विनीतकुमार माथुर की खंडपीठ में बुधवार को मेहरानगढ़ दुखांतिका संघर्ष समित के सचिव मानाराम की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता महेन्द्रसिंह सिंघवी ने बताया कि कोर्ट के आदेश की पालना में चौपड़ा आयोग की मूल रिपोर्ट और उसकी फोटो प्रतिलिपि दो अलग-अलग सीलबंद लिफाफे में पेश की जा चुकी है। आयोग की रिपोर्ट पर उचित निर्णय लेने के लिए पूर्ववर्ती तथा वर्तमान सरकार के कार्यकाल में गठित दो कैबिनेट सब कमेटी की रिपोर्ट के कार्यवाही विवरण की प्रतिलिपि भी अलग से बंद लिफाफे में पेश किया जा चुका है।

खंडपीठ ने कहा कि हादसे की गंभीरता को देखते हुए ही आयोग गठित किया गया था। इसलिए कानूनी प्रावधानों के परिप्रेक्ष्य में देखा जाना जरूरी है कि इस आयोग की रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर रखा जाना आवश्यक है या नहीं। विधिक बिंदु पर बहस के लिए याची के अधिवक्ता विजय मेहता एवं सरकार की ओर से समय मांगा गया, जिस पर अगली सुनवाई 27 नवंबर मुकर्रर की गई।

दरअसल, पहली कैबिनेट सब कमेटी ने यह पाया था कि रिपोर्ट के भाग-2 में वर्णित कुछ तथ्य अनुमान और मिथकों पर आधारित हैं। यदि इन्हें सार्वजनिक किया जाता है तो इससे जनता पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और कानून और व्यवस्था की स्थिति खराब हो सकती है। मंत्रिमंडल सचिवालय के आदेश से वर्तमान सरकार के कायर्यकाल में गठित दूसरी कैबिनेट सब कमेटी ने भी पूर्व कमेटी की अभिशंषा से सहमति व्यक्त की, जिसके बाद कैबिनेट ने भी चौपड़ा आयोग की रिपोर्ट को विधानसभा में नहीं रखने और न ही सार्वजनिक करने का निर्णय लिया था।

गौरतलब है कि 30 सितंबर, 2008 को मेहरानगढ़ किले में स्थित चामुंडा माता मंदिर में नवरात्र के पहले दिन भगदड़ मे 216 लोगों की मौत हो गई थी। तत्कालीन भाजपा सरकार ने अक्टूबर 2008 में जस्टिस जसराज चौपड़ा की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया था जिसने त्रासदी की जांच की और जिम्मेदारी तय की। आयोग ने 5 मई, 2011 को कांग्रेस शासन के दौरान अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी और तब से, रिपोर्ट धूल फांक रही है।

केंद्रीय मंत्री शेखावत के मामले में नहीं आया फैसला
केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत के खिलाफ स्टूडेंट लाइफ के दौरान पुलिस द्वारा पेश किए गए एक परिवाद के मामले में बुधवार को भी फैसला नहीं आया। अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या आठ के पीठासीन अधिकारी सुनील जांगिड़ की अदालत में मंत्री के अधिवक्ता नाथुसिंह राठौड़ की ओर से हाजिरी माफी पेश की गई। इसे स्वीकार करते हुए मजिस्ट्रेट ने फैसला आगामी 13 दिसम्बर तक टाल दिया। गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत को इस मामले में 30 अप्रैल, 2018 को जमानत मिली थी। उसके बाद से मंत्री की ओर से लगातार हाजिरी माफी पेश की जा रही है। शेखावत के खिलाफ पुलिस द्वारा सीआरपीसी की धारा 182 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार शेखावत ने वर्ष 2004 में एक व्यक्ति के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया था।