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जोधपुर के इस ग्रंथागार में है आम रस को सुरक्षित रखने की विधि, यहां और भी हैं दुलर्भ ग्रंथ

राजस्थानी शोध संस्थान में मौजूद है उदयपुर के महाराणा भीमसिंह रचित दुलर्भ ग्रंथ पाकशास्त्र
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जोधपुर. उदयपुर के महाराणा भीमसिंह (1777-1828 ई.) रचित और मेवाड़ी भाषा में लिपिबद्ध दुर्लभ ग्रंथ पाक शास्त्र में आम रस को वर्ष भर सुरक्षित रखने की विधि के साथ पाक शास्त्र से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां संजोई गई है। इस ग्रन्थ की रचना होने के 33 वर्ष बाद तत्कालीन महाराज चन्द्रसिंह के आदेश से भट्ट लिलापत ने इस ग्रन्थ की प्रतिलिपि तैयार की थी। यह प्रतिलिपि चौपासनी स्थित राजस्थानी शोध संस्थान ग्रन्थालय में सुरक्षित है। संस्थान के सहायक निदेशक डॉ. विक्रमसिंह भाटी ने बताया कि ग्रंथ में 115 शाकाहारी और मांसाहारी भोजन बनाने की विधियां, विभिन्न प्रकार के अचार और चपातियों के साथ ही आम रस को वर्ष भर सुरक्षित रखने की विधि भी संजोई गई है। इसको जानने के लिए दूरस्त क्षेत्रों से लोग आते रहे हैं।

घी में पकाएं भोजन, तेल बढ़ाता है दोष

भोजन मंद आंच और सिर्फ घृत का प्रयोग करने की हिदायत दी गई है। तेल का प्रयोग हृदय की दुर्बलता, रक्त और वात-पित्त दोष बढ़ाता है। जबकि गाय का घृत हल्का, तृप्तिदायक, धातुवद्र्धक होता है। मांसाहारी खानपान में हल्दी का प्रयोग नहीं करने की सलाह दी गई है।

ऐसे दें धुंगार

कड़ाई, भगोना, डेगची, डेग, डेगचा जैसे पात्रों में व्यंजन पकाने के बाद उसमें आटे का दीपक बनाकर कस्तूरी व गुलाब का धुंगार देने के साथ ही केसर, गुलाबजल और नीम्बू का रस डालने व्यंजन लजीज, स्वादिष्ट और सुगन्धित होता है। व्यंजनों में डाले जाने वाले मसालों की मात्रा आना, पाव और सेर में दी गई है।

ऐतिहासिक ग्रंथों का है संग्रह

ग्रंथागार में 17 हजार 500 दुर्लभ ग्रन्थों का संग्रह है। इनमें जैन विषयक ग्रन्थ, चारण साहित्य के दोहे, गीत, छप्पय, निसांणी, वचनिका, झमाल, राजस्थानी गद्य की सभी विधाएं, साहित्य-शास्त्र, हिन्दी, राजस्थानी कृतियों के अलावा ज्योतिष, शालिहोत्र और आयुर्वेद के प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथ संग्रहीत हैं। राजस्थानी शोध संस्थान ग्रन्थालय में कई विदेशी शोधार्थी भी प्राचीन व ऐतिहासिक दुलर्भ गं्रथों से जानकारी प्राप्त करने आते हैं। इसके साथ ही मारवाड़ के इतिहास से संबंधित यहां कई महत्वपूर्ण गं्रथ मौजूद हैं।