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काश! लाशें भी अपना दर्द बयां करती

संवेदनहीनता ! अस्पताल में मरने के बाद भी दुर्गति, मोर्चरी का तो 'उपचार' करो
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Hopefully The Dead body may also tell their problem

काश! लाशें भी अपना दर्द बयां करती

मोर्चरी बदहाल, एमडीएम में एक डीप फ्रिज खराब
जोधपुर.

एक तरफ बाड़मेर की रेशमा के शव को सुरक्षित तरीके से अपने देश की माटी तक पहुंचाने के लिए सेना व सरकार के अफसरों ने पूरी संवेदनशीलता बरती, वहीं दूसरी तरफ जोधपुर संभाग के सबसे बड़े मथुरादास माथुर अस्पताल की मोर्चरी में रखे जाने वाले शवों की सुरक्षा को लेकर यहां के अफसरों में कोई संवेदनशीलता नजर नहीं आ रही है।
डॉ. एस.एन. मेडिकल कॉलेज के अधीन एमडीएम अस्पताल की मोर्चरी के हालात बेहद खराब है। पिछले कई दिनों से एक डीप फ्रिज पूरी तरह से खराब है। यदि इसमें शव रखा जाए तो चूहों व कीड़ों के कुतरने की आशंका भी रहती है। दो अन्य डीप फ्रिज के हालात भी अच्छे नहीं हैं। कक्ष में शव का परीक्षण करने के दौरान मेडिकल ज्यूरिस्ट व अन्य स्टाफ को बदबू भरी हवा को सांस में उतारना पड़ रहा है। मोर्चरी के कक्ष में छत से पानी टपकता है। बरसात में बाहर तक पानी भर जाता है। तब हालात और अधिक बिगड़ जाते हैं। सूत्रों के अनुसार इस मोर्चरी में शवों को बेहद ही खराब हालात में रखा जाता है, क्योंकि कोई झांककर गंभीरता से देखता तक नहीं है।

बाहर भी खराब हालात

मथुरादास माथुर अस्पताल की मोर्चरी के बाहर के हालात भी ठीक नहीं है। परिवार में किसी को खोने का सदमा झेल रहे लोगों को बिना पंखे या बदबूदार वातावरण में पोस्टमार्टम प्रक्रिया चलने तक बैठे रहना पड़ता है। यहां पीने के पानी के भी अच्छे इंतजाम नहीं है। यहां कोने पर एक नल लगा रखा है, लेकिन उसके हालात किसी गंदे शौचालय में लगे नल से कम बुरे नहीं है। गांधी अस्पताल की मोर्चरी के हालात कुछ हद तक ठीक है, लेकिन यहां लगे एसी खराब हो चुके हैं। यहां भी पोस्टमार्टम के इंतजार में बैठने वाले परिजनों के लिए हवा-पानी के माकूल इंतजाम की दरकार है।


एम्स में है वातानुकूलित मोर्चरी

जोधपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में शव परीक्षण गृह पूरी तरह से वातानुकूलित है। यहां साफ-सफाई का विशेष प्रबंध है। शव के परीक्षण के दौरान चिकित्सक कक्ष, परिजन आदि के बैठने आदि के लिए पूरी व्यवस्था है। बाहर छायादार पेड़ आदि लगा रखे हैं।


तीन मोर्चरी में 36 शव रखने की क्षमता

जोधपुर शहर में कुल तीन मोर्चरी में 36 शव रखने की क्षमता है। एमडीएम मोर्चरी में 3 डीप फ्रिज है। तीनों में कुल 12 शव तथा महात्मा गांधी अस्पताल की मोर्चरी में 2 डीप फ्रिज लगे हैं, जिसमें कुल 12 शव रखने की व्यवस्था है। एम्स की मोर्चरी में दो डीप फ्रिज है, जिनमें 12 शव रखे जा सकते हैं।


दोनों मोर्चरी के हालात सुधारेंगे

एमडीएम मोर्चरी में सिविल वर्क जल्द शुरू करेंगे। सिविल वर्क होने के बाद वहां सभी तरह की परेशानी दूर हो जाएगी। एक डीप फ्रिज खराब है, संबंधित कम्पनी को ठीक करने के लिए लिखा गया है। गांधी अस्पताल मोर्चरी में भामाशाहों के सहयोग से नए एसी लगाए जाएंगे। दोनों ही जगह अन्य सुविधाएं भी बढ़ाई जाएंगी।
-डॉ. पी. सी. व्यास, विभागाध्यक्ष, फोरेंसिक मेडिसिन विभाग, मेडिकल कॉलेज जोधपुर