
जैसे ही उनकी आराम करने की उम्र आई कोरोना ने हमसे अब्बा को छीन लिया
जोधपुर. अब्बा ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे। मजदूरी करके जैसे-तैसे घर चलाते थे। सारी उम्र उन्होंने हमारे लिए कमाया। जैसे ही उनकी उम्र आराम करने की आई। कोरोना के कारण उनकी मौत हो गई, हमारे सिर से पिता का साया उठ गया। इससे बुरा ओर किया हो सकता है कि हम अब्बा का अंतिम बार चेहरा तक नहीं दे सके। अम्मी तो अभी तक सदमे में है। यह कहना है घंटाघर साइकिल मार्केट निवासी मोहम्मद आसिफ का।
आसिफ ने बताया कि तीन मई की सुबह करीब छह बजे अब्बा (मोहम्मद अय्युब (५२)) की अचानक तबीयत बिगडऩे लगी। हम उन्हें तुरंत अस्पताल ले गए। जहां इलाज के दौरान करीब आधे घंटे बाद उनकी मौत हो गई। मौत के बाद जांच हुई जिसमें सामने आया कि उन्हें कोरोना था। हमें बॉडी नहीं दी गई। प्रशासन ने अपने स्तर पर उन्हें दफनाया। हम तो उनका अंतिम बार चेहरा तक नहीं देख सके।
हमारे साथ रहते थे, तो हम पॉजिटिव क्यों नहीं हुए
आसिफ का कहना है कि हम सभी साथ रहते थे। उनकी मौत के बाद मेरी व छोटे भाई मोहम्मद अरबाज व अम्मी हसीना बानो की भी कोरोना टेस्ट हुआ। लेकिन तीनों में से कोई पॉजिटिव नहीं निकला। ऐसे में सवाल उठता है कि फिर अब्बा कोरोना पॉजिटिव कैसे हो गए। वे तो पूरे लॉकडाउन में घर से बाहर भी नहीं निकले थे। हम सभी एक मकान में रहते थे। आपस में संपर्क में थे तो अम्मी या हम दोनों भाईयों में से कोई कोरोना पॉजिटिव क्यों नहीं हुआ। उनकी कोरोना से मौत का हवाला देते हुए प्रशासन ने दफना दिया।
Updated on:
26 Jun 2020 12:30 am
Published on:
26 Jun 2020 12:30 am
