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काश! पानी पर न हुई होती सियासत तो बुझ जाती 21 सौ गांवों की प्यास

- इस साल बारिश कम हुई तो खल रही लिफ्ट केनाल तीसरे चरण की कमी - अगर प्रोजेक्ट धरातल पर होता तो पाली जिले के कई गांव-कस्बों की भी बुझती प्यास
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काश! पानी पर न हुई होती सियासत तो बुझ जाती 21 सौ गांवों की प्यास

काश! पानी पर न हुई होती सियासत तो बुझ जाती 21 सौ गांवों की प्यास

जोधपुर।
पश्चिमी राजस्थान में औसत से भी कम बारिश इस बार काल का इशारा कर रही है। ऐसे में पूरा पाली जिला व जोधपुर सहित अन्य जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में खेती-पशुओं के लिए पानी की मारामारी हो रही है। इस भीषण संकट के दौर में राजीव गांधी लिफ्ट केनाल का तीसरा चरण पूरा न होना काफी खलता है। जो प्रोजेक्ट पांच साल से भी अधिक समय से कागजों में घूम रहा है यदि वह अब तक धरातल पर आ गया होता तो 21 सौ से ज्यादा गांवों की न सिर्फ प्यास बुझती, बल्कि पशुओं के लिए भी पानी मिल सकता था। लेकिन पानी पर यह सियायत अब तक खत्म नहीं हुई है।

फैक्ट फाइल
- 30 साल आगामी जरूरत के लिहाज से बना है राजीव गांधी लिफ्ट केनाल तीसरा चरण का प्रोजेक्ट

- 1454 करोड़ थी इस प्रोजेक्ट की लागत जब अंतिम बार इसकी डीपीआर बनी
- 2104 गांव की बुझती प्यास

- 5 शहरी व कस्बों के साथ 3 जिले होंगे लाभांवित
- 76 लाख से अधिक जनसंख्या होगी इससे लाभांवित

- 5 साल से यह प्रोजेक्ट कागजों में घूम रहा

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ऐसे इस काळ में होता मददगार

राजीव गांधी लिफ्ट केनाल फेज-3 परियोजना के तहत इंदिरा गांधी मुख्य नहर से वर्तमान खुली नहर के समानान्तर 205 किलोमीटर लम्बी पाइपलाइन पर 4 पम्पिंग स्टेशन की मदद से पानी जोधपुर तक लाया जाना प्रस्तावित है। इसके बाद प्रस्तावित दिल्ली-मुम्बई औद्योगिक गलियारा (डीएमआइसी), रोहट जिला पाली और रीको, जोधपुर में पानी की औद्योगिक आवश्यकताओं की पूर्ति की जाएगी। इसके साथ जोधपुर, पाली व बाड़मेर के 21 सौ गांवों तक पानी पहुंचता। जिससे जवाई बांध पर बोझ थोड़ा कम होता।
ऐसे खाता रहा धक्के

यह प्रोजेक्ट पिछले पांच वर्ष से भी अधिक समय से धक्के खा रहा है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने पहले जब यह प्रोजेक्ट भेजा तो इसे एशियन डवलपमेंट बैंक (एडीबी) से ऋण मिलने की उम्मीद थी, कई साल तक इसका इंतजार होता रहा, लेकिन फाइल आगे नहीं बढ़ी। इसके बाद जापान इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन एजेंसी(जाइका) के जरिये काम करवाने का प्रस्ताव दुबारा भेजा गया, लेकिन फिर फाइल को अनुमति नहीं दी गई। जाइका से अनुबंध में अभी 2 वर्ष का समय और लगता। कार्यादेश जारी होने में 6-7 वर्ष लग सकते थे। ऐसे में सीएम ने इसके लिए बजट जारी करने की सहमति दी थी।

एक्सपर्ट व्यू : अभी स्वीकृत पानी भी पूरा नहीं ले पा रहे
केनाल के जरिये जोधपुर में अभी 240 से 260 क्यूसेक पानी आ रहा है। जबकि जोधपुर के लिए 350 क्यूसेक पानी स्वीकृत है। लेकिन अभी करीब 100 क्यूसेक पानी हम नहीं ले पा रहे। जलदाय विभाग प्रोजेक्ट के सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता निर्मल कच्छवाह ने बताया कि यदि तीसरे चरण का काम शुरू हो जाता और 0 आरडी पर डिग्गी भी बन गई होती तो संकट के समय में स्टोर पानी को उपयोग में लिया जा सकता।