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खुद ही कर रहे उपेक्षा तो औरों से क्या करे अपेक्षा

  राजस्थानी भाषा को राज्य सरकार ही नहीं दे रही बढ़ावा, राजस्थान में 10,848 राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूलों में से महज 57 जगह राजस्थानी विषय
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खुद ही कर रहे उपेक्षा तो औरों से क्या करे अपेक्षा

जोधपुर. एक तरफ जहां राजस्थान की भाषा को मान्यता दिलाने के लिए पूरा प्रदेश एकजुट है तो दूसरी ओर शिक्षा विभाग में जमकर राजस्थानी भाषा की उपेक्षा हो रही है। एक रिकॉर्ड के अनुसार पूरे प्रदेश में 10 हजार 8 सौ 48 राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल हैं, इनमें से केवल 57 स्कूलों में ही राजस्थानी भाषा विषय खुला हुआ है।
शिक्षा विभाग में राजस्थानी भाषा के बढ़ावा न देने से बहुत कम विद्यार्थी राजस्थानी भाषा पढऩे के इच्छुक रहे हैं।

प्रदेश में 11 स्कूलों में राजस्थानी शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। शेष 46 स्कूलों में 37 पुरुष शिक्षक और 9 महिला शिक्षिकाएं सेवाएं दे रही हैं।

राजस्थानी भाषा से ज्यादा उर्दू व पंजाबी के व्याख्याता
राजस्थान में राजस्थानी विषय के व्याख्याताओं से ज्यादा उर्दू व पंजाबी विषयों के शिक्षक हैं। शाला दर्पण के रिकार्ड अनुसार तो 433 स्कूलों में उर्दू विषय सब्जैक्ट हैं। जिनमें 339 पद भरे हुए हैं और 94 पदों पर रिक्तियां है। इसके बाद पंजाबी विषय पढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने 66 स्कूलों में सब्जैक्ट की सुविधा दे रखी है। यहां भी 35 जगह पोस्ट खाली है। गुजराती विषय पढऩे के लिए पूरे प्रदेश में एक स्कूल में सब्जैक्ट है। जहां भी पद खाली पड़ा है। राजस्थान शिक्षा सेवा प्राध्यापक संघ के वरिष्ठ प्रदेश महामंत्री कोमलसिंह चंपावत ने बताया कि राजस्थानी भाषा लंबे समय से उपेक्षा का शिकार है। राजस्थानी सब्जैक्ट हरेक विद्यालय में होना चाहिए। ताकि विद्यार्थियों की रुचि बढ़े।