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आइआइटी की सोलर थर्मल तकनीक बनेगी पेट्रोलियम भण्डारों का विकल्प : प्रो. बैनर्जी
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आइआइटी की सोलर थर्मल तकनीक बनेगी पेट्रोलियम भण्डारों का विकल्प : प्रो. बैनर्जी

- वर्तमान में देश के बाहर से आता है सिलिकन, सौर ऊर्जा हमारी है लेकिन पैनल विदेशी है
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जोधपुर. वर्तमान में देश की कुल ऊर्जा जरुरत का 7 फीसदी सौर ऊर्जा से प्राप्त होता है। लेकिन यह ऊर्जा विदेशियों की मेहरबानी पर निर्भर है। सूरज की गर्मी को बिजली में बदलने वाले सौलर पैनल के लिए सिलिकॉन विदेशों से आयात किया जाता है। आइआइटी जोधपुर वर्तमान में सोलर थर्मल तकनीक पर काम कर रहा है। उम्मीद है कि इसके जरिए सौर ऊर्जा उत्पादन में न केवल आत्मनिर्भरता हासिल होगी वरन् खत्म होते पेट्रोलियम भण्डारों का विकल्प भी मिलेगा।

होमी भाभा राष्ट्रीय संस्थान (एचबीएनआइ) के कुलाधिपति व परमाणु वैज्ञानिक प्रोफेसर डॉ. श्रीकुमार बैनर्जी ने यह बात शनिवार को आइआइटी जोधपुर के चौथे दीक्षांत समारोह में कही। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. बैनर्जी ने कहा कि सोलर थर्मल तकनीक के जरिए पानी को तोडकऱ हाइड्रोजन का उत्पादन संभव होगा। हाइड्रोजन का उपयोग बैटरियां बनाने में किया जाएगा। बैटरियों से भविष्य की गाडिय़ां चलाई जाएंगी। बैटरी चलित वाहनों में पेट्रोल-डीजल की अपेक्षा खर्च तो कम होगा ही, लेकिन इनसे प्रदूषण शून्य होगा।


डॉ. बैनर्जी की खरी-खरी

– आइआइटियन्स को देश की समस्याओं के बारे में भी सोचना चाहिए। आंधप्रदेश की नई राजधानी अमरावती का आर्किटेक्ट सिंगापुर का व्यक्ति है। यहां किसी में काबिलियत नहीं थी।
– बढ़ती जनसंख्या के लिए एक और हरित क्रंाति की जरुरत है। आइआइटियन्स को कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, भण्डारण, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छ पानी, नए शहर, सीवरेज जैसी समस्याओं के निराकरण के लिए भी सोचना चाहिए।

– सॉफ्टवेयर व एप बनाना स्टार्ट अप नहीं, हर क्षेत्र में नई खोज करना स्टार्ट अप है।
– छात्र और शिक्षक पीएचडी के लिए मौलिक टॉपिक का चुनाव करें।

– छात्र आइआइटी से बीटेक तो करते हैं लेकिन एमटैक व पीएचडी करने वालों की संख्या कम है।
– आइआइटी करने के बाद कई छात्र जल्दी नौकरियां बदल देते हैं। यह वैसा ही जैसे बार-बार एक फूल से दूसरे फूल पर जाने वाली तितली मकरंद इकठ्ठा नहीं कर पाती। जबकि एक ही फूल पर चिपकने वाली मधुमक्खी ही शहद का सृजन करती है।

डॉ. चिदम्बरम ने कहा, खुद पर भरोसा रखो

आइआइटी के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष व परमाणु वैज्ञानिक डॉ. आर चिदम्बरम ने छात्र-छात्राओं को खुद पर भरोसा रखने की सलाह दी। समारोह में आइआइटी के निदेशक डॉ. सीवीआर मूर्ति ने भी व्याख्यान दिया।