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न्यायपालिका में जजों के खाली पदों से बढ़ रही पैंडेंसी : सिंघवी

  मरुधर मृदुल स्मृति व्याखान
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जोधपुर

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Amit Dave

Mar 09, 2019

jodhpur

न्यायपालिका में जजों के खाली पदों से बढ़ रही पैंडेंसी : सिंघवी

जोधपुर.
'देश में डिक्टेटरशिप नहीं है। यह समृद्ध लोकतंत्र की खासियत है और न्यायपालिका सक्रिय संस्था है इसीलिए यहां सही और गलत का फैसला होता है। लेकिन न्यायपालिका में लंबित मुकदमों की बढ़ती संख्या और भ्रष्टाचार के आरोप एक बड़ी समस्या है। मुकदमों की बढ़ती संख्या की मुख्य वजह न्यायपालिका में जजों के खाली पद भी है।Ó यह बात राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ अभिषेक मनु सिंघवी ने शनिवार को यहां एयरफोर्स एरिया स्थित भारतीय विद्या भवन के केएम मुंशी सभागार में आयोजित मरुधर मृदुल स्मृति व्याख्यान में कही।

'इंस्टीट्यूश्नल एण्ड नॉन इंस्टीट्यूश्नल पिलर्स ऑफ इंडियन डेमोक्रेसीÓ विषयक व्याख्यान में मुख्य वक्ता डॉ. सिंघवी ने कहा कि देश में केवल 30 प्रतिशत ईवीएम वीवीपैट से जुड़ी हैं। जबकि लोकसभा चुनाव से पहले शतप्रतिशत ईवीएम को वीवीपैट से जोड़ने का काम पूरा करने का दावा किया गया था। प्रदेश की स्थिति यह है कि वोट देने के बाद सैम्पल चैक करने की केवल दो मशीन है।

राजनीति में प्रतिशोध की भावना गणतंत्र के लिए गंभीर

डॉ. सिंघवी ने कहा कि राजनीति में प्रतिशोध की भावना गणतंत्र के लिए गंभीर है। हमारे देश में मजबूत लोकतंत्र है जबकि कई अन्य देशों में लोकतंत्र कमजोर हुआ है। उन्होंने सवाल किया कि क्या पाकिस्तान में इमरान खान व नवाज शरीफ और बांग्लादेश में खािलदा जिया और शेख हसीना एक ही हॉल में साथ बैठ सकते हैं? लेकिन यह भारत में वैचारिक मतभेद के बावजूद संसद में पक्ष-विपक्ष के नेता एक साथ बैठते हैं।

डॉ सिंघवी ने कहा कि भारत का लोकतंत्र यूनिक मॉडल है। यहां न संघवाद है, ना ही एकीकृत व्यवस्था है। जबकि अमरीका में पूरी तरह संघवाद है। भारत में केंद्र मुख्य है और कुछ शक्तियां व अधिकार राज्य को दिए गए हैं। दस संस्थानिक व गैर संस्थानिक स्तंभ ऐसे हैं जो भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करते हैं।

भाषा थोपना नुकसानदायक

भाषायी विवाद पर चर्चा करते हुए डॉ. सिंघवी ने लिंग्वेस्टिक फेडरलिज्म को स्पष्ट किया और कहा कि किसी भाषा को थोपना लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक है। देश में हिंदी, अंग्रेजी व स्थानीय भाषा को मान्यता है। संसद का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां असम या बंगाल, तमिल या कर्नाटक आदि का हो लेकिन वह हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषा में सहज है, क्योंकि उन पर किसी भाषा को थोपा नहीं गया है।

कविता से किया मृदुल को याद
इससे पूर्व कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जीके व्यास ने कविता के माध्यम से मृदुल को श्रद्धांजलि दी। भारतीय विद्या भवन के मानद सचिव प्रो. कल्याणसिंह शेखावत ने अतिथियों का स्वागत व भारतीय विद्या भवन की जानकारी दी। कार्यक्रम में मरुधर मृदुल के परिजन, न्याय जगत से जुड़ी हस्तियां, अधिवक्ता सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे। अंत में आयोजन सचिव अभिषेक कोठारी ने धन्यवाद ज्ञापित किया