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अमरीका की आपत्ति के बाद भारत ने बदली स्कीम

- देश के निर्यातकों के लिए एमइआइएस स्कीम के स्थान पर आएगी नई स्कीम - सरकार ने जारी किया 50 हजार करोड़ रुपए का बजट
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जोधपुर

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Amit Dave

Sep 29, 2019

अमरीका की आपत्ति के बाद भारत ने बदली स्कीम

अमरीका की आपत्ति के बाद भारत ने बदली स्कीम

जोधपुर।

केन्द्र सरकार की ओर से देश के निर्यात उद्योग व निर्यातकों को बढ़ावा देने के लिए अनेक रियायती स्कीम्स दी जा रही है। सरकार द्वारा मर्चेन्डाइस एक्सपोट्र्स फ्रॉम इंडिया स्कीम (एमइआइएस) के तहत निर्यातकों को दी जाने वाली सब्सिडी को बंद करने का निर्णय लिया गया है। यह स्कीम 1 जनवरी 2020 से बंद कर दी जाएगी । हाल ही में, केन्द्रीय मंत्री ने इस स्कीम की जगह रेमिसेशन ऑफ ड्यूटीज और टैक्सेस ऑन एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स की घोषणा की है । यह स्कीम 1 जनवरी 2020 से लागू कर दी जाएगी इसके लिए सरकार ने 50 हजार करोड़ रुपयों का बजट भी पारित किया है । यह स्कीम निर्यातकों, आर्टिजन्स के लिए प्रोत्साहनमुखी होगी।दरअसल अमरीका ने वल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूटीओ) में भारत द्वारा निर्यातकों को दी जाने वाली रियायतों पर एतराज जताया था । अमरीका का कहना है कि इन रियायती स्कीमों के कारण उनकी कम्पनियों को आर्थिक नुकसान झेलना पड रहा है । अमरीका की आपत्ति पर डब्ल्यूटीओ ने भारत से इस संबंध में जल्द ही सकारात्मक कदम उठाने को कहा था। इसके बाद भारत ने एमइआइएस स्कीम को बदलने का निर्णय लिया । डब्ल्यूटीओ के 164 सदस्य देशों में भारत भी वर्ष 1995 से सदस्य है ।

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विभिन्न टैक्स में छूट मिलेगी

वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय की ओर से नई स्कीम की मसौदा तैयार कर लिया गया है। नई स्कीम के तहत जीएसटी रिफ ण्ड पर इंडायरेक्ट टैक्सेज शामिल किए जाएंगे। नई स्कीम में निर्यातकों, आर्टिजन्स के लिए सब्सिडी का प्रावधान होगा, इससे अमरीकी कंपनियों को घाटा नहीं होने के साथ ही भारतीय निर्यातकों, आर्टिजन्स भी प्रभावित न हो। नई स्कीम में निर्यातकों को विभिन्न प्रकार लगने वाली 11 प्रकार की ड्यूटी व टेक्स में छूट दी जाएगी ।

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एेसी योजनाएं आर्टिजन्स के लिए वरदान

वर्तमान में एमइआइएस स्कीम के तहत हैण्डीक्राफ्ट, टेक्सटाइल्स, स्टील व अन्य कुटीर उद्योगों को सरकार की ओर से निर्यात पर 5 प्रतिशत ड्रॉबैक इंसेंटिव मिल रहा है। जोधपुर से हैण्डीक्राफ्ट उत्पादों का सालाना 2500 करोड़ टर्नओवर है। इससे करीब 2 लाख से ज्यादा आर्टिजन, हस्तशिल्पी जुडे़ हुए है। प्रतिस्पर्धा के दौर में कई निर्यातक एेसे है, जो लागत मूल्य पर ही अपने उत्पादों का निर्यात कर रहे है। एेसे निर्यातकों व उनके लिए काम करने वाले आर्टिजनों के लिए यह इंंंसेंटिव वरदान है।

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गाइडलाइन का इंतजार

मंदी का दौर है। नई स्कीम में हस्तशिल्पियों, आर्टिजन्स के लिए प्रोत्साहन का प्रावधान व विभिन्न ड्यूटीज में छूट अच्छा संकेत है। गाइडलाइन का इंतजार है, तभी नई योजना को समझ पाएंगे।

मनीष पुरोहित, सचिव

जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन