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राजस्थान में देश का पहला पंचगव्य चिकित्सा कोर्स शुरू, क्या मेडिकल जगत की सबसे बड़ी खोज होगा साबित ?

राजस्थान के जोधपुर जिले में देश के पहले 'पंचगव्य चिकित्सा पाठ्यक्रम' (Panchgavya Therapy Course) का ऐतिहासिक शुभारंभ किया गया है।
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जोधपुर

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Nakul Devarshi

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Updated: 4 May 2026, 10:35 PM IST

पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत

पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत

राजस्थान की पावन धरा पर सोमवार, 4 मई 2026 को एक नया इतिहास रचा गया। मुख्यमंत्री भजनलाल सरकार की 'गौ-सेवा' की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए जोधपुर जिले के मोकलावास में देश के प्रथम पंचगव्य चिकित्सा पाठ्यक्रम का शुभारंभ हुआ है। पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने गौ संवर्द्धन आश्रम में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान इसकी पहली कक्षा का उद्घाटन किया। यह केवल एक कोर्स नहीं, बल्कि प्राचीन भारतीय ज्ञान और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के मिलन का एक बड़ा केंद्र बनने जा रहा है।

भारत में पहली बार: राजस्थान ने मारी बाजी

देश में पहली बार किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय के तत्वावधान में पंचगव्य (दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर) पर आधारित चिकित्सा पद्धति को आधिकारिक पाठ्यक्रम का रूप दिया गया है।

  • विश्वविद्यालय का साथ: यह पाठ्यक्रम डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर और लक्ष्य पर्यावरण एवं जन कल्याण संस्था के संयुक्त प्रयासों से शुरू किया गया है।
  • पाठ्यक्रम का स्वरूप: इसमें छात्रों को पंचगव्य के सिद्धांत, औषधि निर्माण, जटिल रोगों के उपचार और पंचकर्म पद्धतियों का गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा।

सिर्फ इलाज नहीं, रोजगार की भी गारंटी!

मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि यह पाठ्यक्रम ग्रामीण विकास और युवाओं के लिए वरदान साबित होगा।

  • गौशाला प्रबंधन: कोर्स के दौरान छात्रों को गौशाला प्रबंधन और गौ-उत्पाद आधारित स्वरोजगार का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी मिलेगा।
  • रोजगार के अवसर: इससे न केवल आयुर्वेद के क्षेत्र में नए चिकित्सक तैयार होंगे, बल्कि ग्रामीण युवाओं को उनके अपने क्षेत्रों में ही रोजगार और व्यापार के अवसर मिलेंगे।

गौ-सेवा का अनूठा उदाहरण: मंत्री ने खिलाई 'ग्वार लापसी'

कार्यक्रम के दौरान मंत्री कुमावत ने गौ संवर्द्धन आश्रम का गहन अवलोकन किया। वे आश्रम में तीन पीढ़ियों वाली गायों और स्वस्थ नंदी को देखकर गदगद हो उठे।

  • सहज भाव: मंत्री ने खुद गौवंश को विशेष रूप से तैयार 'ग्वार लापसी' खिलाई और आश्रम के प्रकल्पों की सराहना की।
  • सम्मान: इस अवसर पर ग्रामीण अंचलों की उभरती हुई प्रतिभाओं को भी सम्मानित किया गया, जिससे स्थानीय युवाओं का मनोबल बढ़ा।

मौजूद रहे दिग्गज

इस ऐतिहासिक पल के गवाह पाली के पूर्व सांसद पुष्प जैन, आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति वैद्य गोविंद शुक्ला सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य नागरिक बने।

क्या पंचगव्य होगा भविष्य की 'असाध्य' बीमारियों का तोड़?

आज जब पूरी दुनिया 'बैक टू नेचर' की बात कर रही है, तब राजस्थान की यह पहल वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पंचगव्य चिकित्सा से कई ऐसी बीमारियों का इलाज संभव है जहाँ एलोपैथी भी सीमित हो जाती है। क्या यह पाठ्यक्रम राजस्थान को 'मेडिकल टूरिज्म' का नया हब बनाएगा? क्या अब विदेशी छात्र भी जोधपुर की धरती पर गायों से जुड़ी चिकित्सा पद्धति सीखने आएंगे? यह तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन शुरुआत 'धमाकेदार' हुई है।