
RAILWAY---छोटे गांवों-कस्बों से दूर होती भारतीय रेल
जोधपुर.
लॉकडाउन के दौरान पिछले वर्ष मार्च में बंद की गई रेल सेवा बड़े स्टेशनों के यात्रियों के लिए तो धीरे-धीरे फि र शुरू कर दी गई लेकिन छोटे स्टेशनों के यात्री एक साल बाद भी रेलसेवा को तरस रहे है । इसके चलते छोटे स्टेशनों से यात्रा करने वाले निम्न व मध्यम वर्ग के लोगों को काफ ी असुविधा हो रही है । बीते साल मार्च में लॉकडाउन लागू होने के साथ ही रेलवे द्वारा बंद की ट्रेनों में से 70 फ ीसदी वापस पटरियों पर दौडऩे लगी हैं लेकिन गांवों-कस्बों को रेलसेवा से दूर रखा जा रहा है।
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एक साल बाद भी पटरी पर नहीं
- बीकानेर-जयपुर/जोधपुर रेलमार्ग पर सुरतगढ़-जयपुर, बटिंडा-जोधपुर सवारी गाड़ी।
- जैसलमेर से जयपुर के बीच चलने वाली लीलण एक्सप्रेस।
- जोधपुर-रतनगढ़ मार्ग पर हर छोटे स्टेशन पर ठहराव वाली जोधपुर-रेवाड़ी।
इस वजह से जाजीवाल, असारानाडा, खेड़ी सालवा, साथिन, उम्मेद, खारिया खंगार, जोगीमगरा जैसे अनेक छोटे स्टेशन एक साल बाद भी रेलयात्रा से महरुम है ।
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जोधपुर-भोपाल एक्सप्रेस के ठहराव हुए बंद
कोरोना संक्रमण के पहले तक जोधपुर-भोपाल एक्सप्रेस ट्रेन हर छोटे स्टेशनों पर रुकती थी, उनमें से 38 स्टेशनों पर ट्रेन के स्टॉपेज खत्म कर दिए है। खासकर छोटे स्टेशनों से सफ र कर जोधपुर, जयपुर, भोपाल जैसे मुख्य स्टेशनों पर तक सफ र करने वाले यात्रियों को दिक्कत हो रही है।
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नहीं लौटाई रियायत
लॉकडाउन के पहले तक ट्रेनों में वरिष्ठ नागरिकों को किराए में छूट मिलती थी, जो बंद कर दी गई। अब पुन: ट्रेनें चालू कर दी गई लेकिन वरिष्ठ नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण किराए में छूट वाली सुविधा अब तक शुरू नहीं की है। रोज यात्रा करने वाले छात्रों, नौकरी पैसा लोगों के लिए मासिक सीजन टिकट (एमएसटी) सुविधा भी वापस शुरू नहीं की गई । आरटीआई कार्यकर्ता दीनदयाल बंग का कहना है कि सरकार को वे यात्री सुविधाएं अब लौटानी चाहिए, जो कोरोना संक्रमण के पूर्व तक यात्रियों को बिना शुल्क के मिल रही थी।
Published on:
23 Mar 2021 05:57 pm
