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जोधपुर की यादें लेकर लौटे रूसी वायुयोद्धा, भारत और रूस की वायुसेना के संयुक्त युद्धाभ्यास का समापन

युद्धाभ्यास की खास बात यह रही कि रूसी वायुसैनिक अपने साथ लड़ाकू विमान व हेलीकॉप्टर नहीं लाए।
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जोधपुर. भारतीय वायुसेना और रूस की रशियन फैडरेशन एयरोस्पेस फोर्स के बीच संयुक्त युद्धाभ्यास एविइंद्रा-2018 का समापन शुक्रवार को हो गया। रूसी वायुसैनिकों के 28 सदस्यीय दल ने जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन से विदा ली। दोनों देशों की वायुसेना ने 12 दिन तक जोधपुर में सुखोई-30 लड़ाकू विमान, एमआइ-17वी5 हेलीकॉप्टर और एएन-32 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के साथ युद्धाभ्यास किया था। इस दौरान आतंक विरोधी अभियान, रेसक्यू ऑपरेशन व अटैक ऑपरेशन किए गए।

एविइंद्रा 10 दिसम्बर को जोधपुर में शुरू हुआ था। युद्धाभ्यास की खास बात यह रही कि रूसी वायुसैनिक अपने साथ लड़ाकू विमान व हेलीकॉप्टर नहीं लाए। भारत के सुखोई, मिग श्रेणी के लड़ाकू विमान और एमआइ श्रेणी के हेलीकॉप्टर रूस में ही बने होने की वजह से रूसी सैनिकों ने भारतीय वायुसेना के ही फ्लाइंग असेट्स का उपयोग किया। युद्धाभ्यास का मुख्य फोकस आतंक विरोधी गतिविधियों पर था। इसके लिए चांधण स्थित फायरिंग रेंज में जॉइंट ऑपरेशन भी किया गया। दोनों देशों के वायुसैनिकों ने आतंकी ठिकानों पर सुव्यवस्थित तरीके से एयर अटैक करने के साथ अन्य रणनीति तैयार करने, आपसी समझ विकसित करने, समूह में हमला करने, एयरक्राफ्ट व ग्राउण्ड स्टाफ में बेहतर सामंजस्य स्थापित करने सहित कई प्रकार की रणनीति पर काम किया। फ्लाइंग ऑपरेशन के दौरान भारतीय वायुसैनिक पायलट और रूसी वायुसैनिक कॉ-पायलट बने थे।