10 अगस्त 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

पानी की तलाश में बेकसूर पैंथर हो रहे मौत का शिकार

नहीं दिया गया ध्यान तो गड़बड़ा जाएगा इॅको सिस्टम बैलेंस
2 min read
Google source verification
पानी की तलाश में बेकसूर पैंथर हो रहे मौत का शिकार

पानी की तलाश में बेकसूर पैंथर हो रहे मौत का शिकार

जोधपुर. भीषण गर्मी में सिरोही व पाली जिले के जंगलों में अपने प्राकृतवास छोड़कर भोजन - पानी की तलाश में पलायन करने के दौरान पैंथर अपनी जान गंवाने लगे हैं । भोजन पानी के लिए लंबी दूरी तय करने के दौरान रिहायशी क्षेत्रों में कभी ग्रामीणों के हत्थे चढ़कर तो कभी शिकारियों के फंदे में फंसकर जान गंवाने की घटनाएं होने के बावजूद वनविभाग सुध नहीं ले रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार पाली व सिरोही जिलों में पैंथर की संख्या लगातार कम हो रही है। जोधपुर संभाग के जिलों में पैंथर की संख्या 136 से भी कम हो चुकी है।

भोजन भी हो रहा खत्म

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार कुंभलगढ़ सेंचुरी , राजसमंद , पाली की पहाड़ियां पैंथर के प्राकृत आवास है । इन क्षेत्रों में पैंथर के प्राकृतिक भोजन खुर वाले जानवर सांभर , नीलगाय आदि वन्यजीव खत्म हो चुके हैं । गर्मी में पानी और वैकल्पिक भोजन की तलाश में भटकते हुए पैंथर कई बार दूसरी टेरिटोरियल में चले जाते है जहां पहले से ही मौजूद पैंथर से संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे में आपसी संघर्ष में जान गंवानी पड़ती है।

पैंथर की जोधपुर में मौत

पाली जिले के देसूरी रेंज में नाडोल के कोटडी गांव में 20 मई को पैंथर के आपसी संघर्ष में एक पैंथर गंभीर घायल होने से चेहरे व सिर में सूजन व खून जमा हो गया। सूचना मिलने के बाद वनविभाग की टीम जोधपुर के वन्यजीव चिकित्सालय लेकर पहुंची जहां उसका उपचार शुरू किया गया। दिमाग की सूजन व नर्वस सिस्टम के उपचार के दौरान फीड्स (ताणे) आने के कारण श्वसन तंत्र व मस्तिष्क काम करना बंद करने से पैंथर की मृत्यु हो गई।

पानी की व्यवस्था हो

जोधपुर संभाग के विभिन्न क्षेत्रों में विचरण करने वाले पैंथरों के प्राकृतवास में पर्याप्त मात्रा में पानी की व्यवस्था की जानी चाहिए। पूरे प्रदेश में सर्वाधिक बिग केट कुंभलगढ़ सेंचुरी व आसपास की पहाडि़यों में है जो इॅको सिस्टम को बैलेंस करते है और उनका संरक्षण आवश्यक है।

डॉ. हेमसिंह गहलोत, वन्यजीव विशेषज्ञ जोधपुर

पैंथर के दिमाग का हिस्सा क्षतिग्रस्त

आपसी संघर्ष में गंभीर घायल पैंथर के दिमाग का अधिकांश हिस्सा काम करना बंद कर चुका था । चार दिनों तक जोधपुर के वन्यजीव चिकित्सालय में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।विजय बोराणा, उपवन संरक्षक वन्यजीव जोधपुर