फ़ेस्टिव और सावों के सीजन में जोधपुरी कोट का क्रेज बढ़ा

 

अब सैकड़ों कलर्स में रेडिमेड भी उपलब्ध

By: Nandkishor Sharma

Updated: 28 Oct 2020, 07:11 PM IST

जोधपुर. कोरोनाकाल में फेस्टिव और सावों के सीजन में जोधपुरी कोट का क्रेज बरकरार है। कोविड-19 के दौरान फैशन की दुनिया में बंद गले के जोधपुरी कोट की मांग कम जरूर हुई थी लेकिन धीरे धीरे पुन: सदाबहार फैशन के रूप में पुन: अपनी जगह कायम करने लगा है। एक ऐसा परिधान जिसमें जोधपुरी शान के साथ सौम्यता और सादगी भी समाहित है। यही कारण है कि यह परिधान आज भी हर वर्ग की पहली पसंद बना हुआ है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी, पीवी नरसिंहा राव जोधपुरी कोट पहनने के शौकीन रहे हैं। वर्तमान में सभी प्रमुख क्रिक्रेटर, बॉलीवुड स्टार्स, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पसंद है। जोधपुरी कोट सिलाई के विशेषज्ञ युवा सौरभ दैया ने बताया कि उनकी तीन पीढ़ी से जोधपुरी कोट बनाने का काम हो रहा है। पहले उनके दादा रामचन्द्र और उसके बाद पिता रमेश कुमार और अब वे स्वयं भी यह काम कर रहे हैं। दो दशक पूर्व तक कारीगर कम होने से समय ज्यादा लगता था लेकिन अब उपकरणों की सुविधाएं होने से मात्र एक से दो दिन में ही जोधपुरी कोट सिल कर तैयार हो जाता है।

सावों में जबरदस्त मांग
सरदारपुरा सी रोड पर स्थित प्रतिष्ठान के संचालक रूपेश माथुर ने बताया कि जोधपुरी कोट पूर्व में मात्र एक या दो कलर्स में तैयार करवाया जाता था लेकिन अब सैकड़ों कलर्स में रेडीमेड उपलब्ध होने से युवाओं में क्रेज बढ़ा है। खास तौर पर सावों और फेस्टिव सीजन में इनकी जबरदस्त मांग है।

एक रोचक घटना से हुआ था जोधपुरी कोट व ब्रीचिस का अविष्कार

जोधपुर के महाराजा तख्तसिंह के तीसरे राजकुमार सरप्रताप की ओर से अविष्कृत विश्व - प्रसिद्ध जोधपुरी कोट और ब्रीचिस भारतीय संस्कृति को अनुपम देन है । जोधपुरी कोट तो आज भारत की राष्ट्रीय पोशाक का एक अंग बन गया है। आजादी के बाद देश के सभी राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के लिए अघोषित रूप से राष्ट्रीय पोशाक बने कोट के अविष्कार की भी रोचक किस्सा है। सर प्रताप वर्ष 1887 में इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया की हीरक जयंती समारोह में भाग लेने पानी के जहाज से लंदन जाते समय एक जगह ठहराव के समय जहाज कहीं लापता हो गया। इंग्लैंड पहुंचने के बाद उनके समक्ष कपड़ों का संकट होने पर भी विदेशी परिधान नहीं पहने। सर प्रताप ने तुरंत मार्केट से कपड़ा खरीदा और स्वयं उसकी कटिंग कर एक दर्जी से उसकी सिलाई करवाई। कोट तैयार होने के बाद जब समारोह में पहुंचे तो फैशन की दुनिया में तहलका मच गया। सर प्रताप ने जो परिधान पहना उसे जोधपुरी ब्रिीचिस नाम दिया गया। फैशन की दुनियां में जोधपुरी कोट आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है।

Patrika
Nandkishor Sharma Desk
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