शीतला अष्टमी के दिन शहर के अधिकांश घरों में बुधवार को रसोई में चूल्हा नहीं जलेगा। इसके एक दिन पहले मंगलवार को घर-घर में विभिन्न प्रकार के पारंपरिक व्यंजन बनाए जाएंगे। इनमें विशेष रूप से करबा, राब, पंचकूटे की सब्जी, मठरी, दही-बड़े, कांजी-बड़े, मीठी-नमकीन पुड़ियां आदि तो कई घरों में सोमवार से ही बनने शुरू हो चुके है।