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जोधपुर . जीएसटी प्रणाली लागू होने के बाद जोधपुर का हैण्डीक्राफ्ट निर्यात उद्योग की कमर निरन्तर टूटती जा रही है। जीएसटी लागू होने के बाद पहले ४ महिनों के लिए हैण्डीक्राफ्ट फर्नीचर उद्योग पर २८ प्रतिशत रखा गया था, जो गत १५ नवम्बर को घटाकर १८ प्रतिशत कर दिया गया। इसके बावजूद भी इस उद्योग की समस्याएं कम नहीं हो रही है और विश्व बाजार में जोधपुर का हैण्डीक्राफ्ट महंगा होता जा रहा है । जीएसटी लागू होने के पहले 4 माह में जोधपुर के हैण्डीक्राफ्ट निर्यात उद्योग में 50 प्रतिशत तक की गिरावट आई, जो अब तक जारी है।
विदेशी ग्राहकों का नए बाजार की ओर रुख
जीएसटी की वजह से जोधपुर का हैण्डीक्राफ्ट महंगा होने के कारण विदेशी ग्राहक जोधपुर के हैण्डीक्राफ्ट से मुंह मोडऩे लग गए हैं और अब दूसरे बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं। विदेशी ग्राहक अब चीन, विएतनाम, इंडोनेशिया की ओर रुख कर रहे हैं। विदेशी ग्राहकों को इन देशों में जोधपुर से कम रेट पर हैण्डीक्राफ्ट उत्पाद मिल रहे हैं।
नुकसान उठाकर करना पड़ रहा निर्यात
निर्यातकों के अनुसार, क्रिसमस को लेकर अप्रेल माह में यूके, यूरोप, अमरीका के बायर्स से आर्डर लिया गया था। उस समय की परिस्थितियों के हिसाब से आर्डर सप्लाई का एग्रीमेंट हुआ। आर्डर की सप्लाई अगस्त, सितम्बर, अक्टूबर और मध्य नवंबर तक हो चुकी हैं, लेकिन निर्यातकों को यह आर्डर 28 फ ीसदी नुकसान में सप्लाई करना पड़ा है, क्योंकि जुलाई में सरकार ने जीएसटी लगाया था। अभी तक हैण्डीक्राफ्ट उद्योग पूरी तरह से टैक्स फ्री था, लेकिन अब इस उद्योग पर १८ फ ीसदी टैक्स लग चुका है। जिसे निर्यातकों की ओर से सरकार के पास जमा भी कराया जा चुका है। यहीं नहीं, जो आर्डर सप्लाई हुआ है, उसका भुगतान भी शिपमेंट पहुंचने के 120 दिन बाद बायर्स की ओर से किया जाएगा। ऐसे में निर्यातकों को समझ में नहीं आ रहा है कि नुकसान में सप्लाई किया गया 28 फ ीसदी आर्डर की भरपाई कैसे होगी?
निर्यातकों का आईटीसी भी फंसा
सरकार के पास कई निर्यातकों के करोड़ों रुपयों के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) भी फ ंस गया है। जो सरकार से अभी तक रिलीज भी नहीं हो सका है। ऐसे में निर्यातकों के सामने अन्य विदेशी ग्राहकों का ऑर्डर पूरा करने का संकट खड़ा हो गया है। एेसी स्थिति में नया ऑर्डर लेने की बात निर्यातक की ओर से सोची ही नहीं जा रही है।
स्पेशल पैकेज की घोषणा हो
जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. भरत दिनेश ने बताया कि हैण्डीक्राफ्ट उद्योग पर जीएसटी की दरों में और कटौती की जानी चाहिए व सरकार को निर्यात को बढ़ावा देने के लिए स्पेशल पैकेज की घोषणा की जानी चाहिए। अब हालात यहां तक पहुंच चुके है कि बायर्स का आर्डर लेने से ही निर्यातकों ने मना करना शुरू कर दिया है। जो भारतीय अर्थव्यवस्था के नजरिए से उचित कदम नहीं माना जा रहा है।
Published on:
23 Dec 2017 02:50 pm
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