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Jodhpur : रावण के ससुराल में आज भी विद्यमान है रावण की चंवरी

पर्यटकों से कोसों दूर रावण की चंवरी संरक्षण के बिना खो रहे है वजूद

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Jodhpur : रावण के ससुराल में आज भी विद्यमान है रावण की चंवरी

जोधपुर/मंडोर. जोधपुर की प्राचीन राजधानी माने जाने वाले मंडोर में कई पुरा महत्व के स्मारक ऐसे हैं, जो पर्याप्त संरक्षण न होने के कारण अपना वजूद खोते जा रहे हैं। ऐसा ही एक स्मारक रावण की चंवरी है, जो पिछले कई वर्षों से उपेक्षित होने के कारण आमजन और पर्यटकों की नजरों से दूर है। शहर के मंडोर स्थित प्राचीन रावण की चंवरी आज भी पर्यटकों की नजर से दूर है। यहां हर समय सन्नाटा पसरा रहता है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाले इस स्मारक की सुध लेने वाला कोई नहीं है। पर्याप्त संरक्षण नहीं होने के कारण यह स्मारक धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। मंडोर रेलवे स्टेशन के पास पहाड़ी की एक टेकरी पर प्राचीन रावण की चंवरी स्थित है। यहां एक चट्टान में गणपति व सप्त मातृकाओं की प्रतिमाएं उत्कीर्ण हैं। संपूर्ण चट्टान पर एक बरामदा बना हुआ है। साथ ही चंवरी तक पहुंचने के लिए सीढिय़ां बनी हुई हैं। पुरातत्व विभाग के अधीन आने वाली इस चंवरी के ठीक पास पर्यटन विभाग ने इससे सम्बन्धित बोर्ड भी लगा रखा है।

पर्यटकों की आवाजाही कम
किंवदंतियों के अनुसार रावण की पत्नी मंडोदरी मण्डोर की राजकन्या थी और उसका इसी स्थान पर विवाह हुआ था। यह प्राचीन स्मारक पर्याप्त सार-संभाल न होने के कारण बदहाल स्थिति में है। पूरा स्मारक गंदगी और मलबे से अटा पड़ा है। इसके चारों ओर बबूल की झाडिय़ां उगी हुई हैं। पुरा स्मारक के आसपास मकान और आबादी बस गई है। चंवरी की ओर जाने वाला रास्ता भी अब संकरा होता जा रहा है। पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं होने के कारण यहां पर्यटकों की आवाजाही भी नहीं होती है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि इस प्राचीन स्मारक का पर्यटन विभाग और पुरातत्व विभाग को व्यापक स्तर पर प्रचार करना चाहिए। इसके लिए मंडोर उद्यान के आसपास साइन बोर्ड लगाने चाहिए।

सुमनोहरा बावड़ी भी लावारिस
रावण की चंवरी के ठीक पास एक एल आकार की प्राचीन सुमनोहरा बावड़ी है। यह बावड़ी भी पर्याप्त संरक्षण नहीं होने के कारण अपना अस्तित्व खोती जा रही है। कचरे और मलबे से अटी इस बावड़ी के चारों ओर कचरा, मलबा और झाडिय़ा उगी हुई हैं। इस बावड़ी के भीतर एक शिलालेख खुदा हुआ है, जिस पर कुछ श्लोक लिखे गए हैं।

शिलालेख पर इतिहास

बावड़ी के अंदर खुदे शिलालेख का एक चित्र पुरातत्व विभाग के पास है, जो बड़ी सुरक्षा के साथ रखा गया है। इस चित्र के नीचे श्लोक का हिंदी में वर्षों पूर्व किसी ने रूपांतरण किया है, जो इस प्रकार है:
1. प्रथम श्लोक के शुरू में शिव को नमस्कार है। तदनुतर प्रथम पद्ध में वरुण देवता की वर्णासपूर्वक मंगला चरण है।

2. दूसरे श्लोक में वामन भागवन को वर्णासपूर्वक मंगलाचरण है।
3. तीसरे श्लोक में चंपण के पुत्र माधु के पुत्रक नाम हैं और उसके विषय में लिखा है कि उसका स्थान 'बहिईश्वर' है। वह यशस्वी और द्रव्यवाहन है और गुणीजनों में अग्रणी है।


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