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अतीत के आईने में जोधपुर :शिप हाउस

पार्ट--- 6
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अतीत के आईने में जोधपुर :शिप हाउस

शिप हाउस

नंदकिशोर सारस्वत

जोधपुर. वर्तमान नागौरीगेट के बाहर स्थित शिप हाउस का निर्माण महाराजा सरप्रतापसिंह ने 1886 में खुद के निजी आवास के लिए करवाया था। छोटी सी पहाड़ी पर शिप के आकार का होने के कारण ही इसे 'शिप हाउस कहा जाता है। यह तीन मंजिला भवन शहरवासियों के लिए तब अजूबा बन गया था। पानी के जहाज की प्रतिकृति जैसे पहाड़ी पर बैठा दी गई हो। सरप्रताप ने शांति और युद्ध के समय तब सबसे अधिक विदेश यात्राएं पानी के जहाज से की थी। कहा जाता है की सरप्रताप ने जहाज के आकार का आवास बनाना चाहा जिसका नक्शा जीजे ओवरीन और जोधपुर राज्य के तत्कालीन अभियंता होम के निर्देशन में तैयार किया गया। शिप हाऊस के नीचे की मंजिल में घोड़ों के लिए अस्तबल बनाए गए और पहाड़ी के दक्षिण में दो पोलो के मैदान भी बनाए जो अब आवासीय बस्ती बन चुके हैं । शिप हाऊस में सर प्रताप रहने भी लग गए थे परन्तु एक अंग्रेज मित्र की सलाह के बाद रातानाडा में नया बंगला बनवाया गया जिसमें सर प्रताप ने निवास किया ।

शिप हाउस बना था पहला ब्रॉडकास्टिंग स्टेशन

शिप हाउस में ही 25 जनवरी 1949 को जोधपुर ब्रॉडकास्टिंग स्टेशन का शुभारंभ किया गया। यहा से महाराजा के निजी ट्रांसमीटर से कुछ मारवाड़ी गीत और भजन प्रसारित किए जाते रहे । इसे उस समय नभवाणी केन्द्र कहा जाता था ।
यह राजस्थान का प्रथम ब्राडकास्टिंग स्टेशन था । राज्य सरकार के आदेश के बाद में बाद में 1 फरवरी 1950 को रेडियो का प्रसारण शिप हाऊस से बन्द कर दिया गया । शिप हाऊस महाराजा जोधपुर की निजी सम्पदा है और वर्तमान में यह इमारत बन्द पड़ी है । यहाँ पर हेरिटेज संग्रहालय बनाने की योजना है जो जल्द ही शुरू होने की सम्भावना है ।