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एेतिहासिक मंडोर किले पर इस वजह से एक भी कर्मचारी तैनात नहीं रहता, वजह जान हो जाएंगे हैरान

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण जयपुर मंडल में दुगना स्टाफ कार्यरत

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एेतिहासिक मंडोर किले पर इस वजह से एक भी कर्मचारी तैनात नहीं रहता, वजह जान हो जाएंगे हैरान

जोधपुर/मंडोर. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के राजनीतिक गढ़ माने जाने वाले सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र स्थित मंडोर किले के प्रति केन्द्र सरकार की बेरुखी लंबे अरसे से बरकरार है। किले की देखभाल के लिए एक मात्र स्टाफ तक तैनात नहीं होने के कारण जुआघर में तब्दील हो चुके किले में रात को शराब की महफिलें जमने लगी हैं। एक पखवाड़े पहले शराबियों ने किले में लगी झाडिय़ों में आग लगा दी थी, जिससे वहां पड़े विष्णु मंदिर के अवशेष भी चपेट में आ गए। इसके बाद भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के किसी भी अधिकारी ने मौके पर आकर सुध नहीं ली।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण एक नजर में
करीब 157 साल पहले दिसम्बर 1861 में स्थापित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का मुख्य उद्देश्य प्राचीन और ऐतिहासिक स्थलों के अन्वेषण, संरक्षण, परिरक्षण, पुरालेखीय शोध, संग्रहालयों की स्थाना, स्मारक परिसरों में उद्यान विकास, देश की बहुमूल्य कलाकृतियां विदेश जाने से रोकना, पुरावशेष सूचीबद्ध करना और वास्तुशिल्पीय सर्वेक्षण करना इत्यादि शामिल हैं। वर्तमान में यह विभाग देश के करीब 3 हजार 676 केंद्रीय संरक्षित स्मारकों व पुरातात्विक स्थलों की देखरेख व संरक्षण का कार्य अपने 25 मंडलों के माध्यम से कर रहा है। जयपुर मंडल की स्थापना सन 1985 में भारत सरकार ने राजस्थान में स्थित केंद्र सरकार संरक्षित स्मारकों, पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण व परिरक्षा के लिए जयपुर मंडल की स्थापना की। शुरुआती काल में इसके दक्षिणी भाग में स्थित स्मारकों की देखभाल बड़ौदा मंडल और उत्तर में स्थित स्मारकों की देखभाल दिल्ली के देहरादून मंडल की ओर से की जाती थी। वर्तमान में राजस्थान के 160 केंद्र सरकार संरक्षित स्मारकों को 9 उप मंडलों में विभाजित किया गया। अप्रेल, 2014 में विभाग की प्रदेश इकाई के दो सर्किल जयपुर और जोधपुर बना दिए गए। जयपुर से अलग हो चुके आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया जोधपुर सर्किल को कुल 11 जिलों के 73 स्मारकों के संरक्षण का जिम्मा तो सौंप दिया गया लेकिन वो स्टाफ देना ही भूल गए।


जयपुर मंडल में स्टाफ की बहार

जहां एक ओर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मंडल जोधपुर स्टाफ की कमी से जूझ रहा है वहीं जयपुर मंडल में स्टाफ की बहार है। जयपुर में 6 सीनियर सीए, 2 जूनियर एडिशनल अधिकारी, 3 यूडीसी, 3 एलडीसी, 2 पुरातत्वविद सहयक, 1 डिप्टी इंजीनियर, 1 डिप्टी अधीक्षक, 1 स्टेनो, 1 डिप्टी सुपरवाइजर, 1 फोटोग्राफर गे्रड प्रथम, 10 मल्टीटास्क स्टाफ और 2 सर्वेयर नियुक्त हैं।

जोधपुर मंडल के अधीन कई विश्व विरासतें
जयपुर मंडल के बाद भारत सरकार ने जोधपुर मंडल स्थापित कर राजस्थान के 18 जिलों में स्थित विश्व विरासत के संरक्षण की जिम्मेदारी सौंपी थी। जोधपुर मंडल को स्थापित करने के बाद जयपुर मंडल से आधा स्टाफ भी स्थानांतरित होना था, लेकिन स्टाफ के अधिकतर लोग राजनीतिक प्रभाव से रिलीव नहीं हुए। सिर्फ 2 यूडीसी के भरोसे पूरे मंडल में प्रदेश के 18 जिलों में विश्व विरासत संभालने वाला मंडल का मुख्य कार्यालय मात्र 2 यूडीसी के भरोसे संचालित हो रहा है। मंडल कार्यालय में करीब 55 महत्वपूर्ण पद लंबे अरसे से रिक्त पड़े हैं। मंडोर किले के प्रबंधन, देखभाल करने वाले आर्कियोलोजिकल सर्वे आफ इंडिया का मुख्यालय भी वर्तमान में पाली रोड स्थित आफरी परिसर में किराए पर संचालित हो रहा है। पूर्व में विभाग का मुख्यालय मंडोर में एक निजी भवन में किराए पर संचालित किया गया, लेकिन सुरक्षा कारणों से शीर्ष अधिकारियों के आदेश के बाद मुख्यालय आफरी में शिफ्ट किया गया।


जोधपुर मंडल को 73 स्मारकों का जिम्मा

एएसआई जोधपुर सर्किल के अधीन अजमेर , बांसवाड़ा, बीकानेर , चित्तौडगढ़़, डूंगरपुर, गंगानगर, हनुमानगढ़, जैसलमेर , जोधपुर, राजसमंद और उदयपुर के कुल 73 ऐतिहासिक स्मारकों की देखरेख व संरक्षण का जिम्मा है। जोधपुर में एकमात्र मंडोर किला ही विभाग के अधीन है। कुंभलगढ़, चित्तौडगढ़़ और जैसलमेर फोर्ट में सर्वाधिक पर्यटकों की आवक के कारण विभाग मंडोर किले की ओर से ध्यान नहीं दे रहा है। दो दशक से मंडोर किले की खुदाई का काम अटका पड़ा है। मंडोर किला देखने आने वाले पर्यटकों के लिए शौचालय की व्यवस्था अभी तक नहीं हो पाई है। प्राचीन संस्मारक और पुरातत्ववीय स्थल व अवशेष अधिनियम 2010 यथा संशोधित प्राचीन संस्मारक और पुरातत्वीय स्थल अवेशष अधिनियम 1958 के प्रावधान व नियम के विपरीत मंडोर क्षेत्र में कई जगहों पर प्याऊ आदि का निर्माण होने के बावजूद अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।

इनका कहना है
स्टाफ की कमी के बारे में विभाग के शीर्ष अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं। उम्मीद है कि जल्द ही स्टाफ की कमी दूर हो जाएगी।

-वी बडिग़ेर, अधीक्षण, पुरातत्वविद

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