खुद की कमाई में लापरवाह बना हुआ है नगर निगम, वेतन देने जितना राजस्व भी नहीं कमा पा रहा

खुद की कमाई में लापरवाह बना हुआ है नगर निगम, वेतन देने जितना राजस्व भी नहीं कमा पा रहा

Harshwardhan Singh Bhati | Publish: Aug, 10 2018 11:22:39 AM (IST) Jodhpur, Rajasthan, India

आपसी विवाद के बीच निगम ने जून में अर्जित किया महज 2 करोड़ का राजस्व

अभिषेक बिस्सा/जोधपुर. नगर निगम खुद की कमाई को लेकर भी लापरवाह बना हुआ है। निगम की तीन माह की आय पर नजर डाले तो कर्मचारियों को वेतन चुकाने जितना राजस्व भी निगम नहीं कमा पाया है। जबकि निगम को मई से जुलाई के बीच सर्वाधिक 6 करोड़ रुपए की आय हुई। जून में चले महापौर-अधिकारी व कर्मचारी विवाद के बीच नगर निगम ने महज 2 करोड़ का राजस्व ही अर्जित किया। इन दिनों नगर निगम की अवैध निर्माण पर कार्रवाई के प्रति बेरुखी हर रोज लाखों का नुकसान दे रही है। उम्मीद के मुताबिक आय नहीं होने से निगम को अपने कर्मचारियों को वेतन देना भी भारी पड़ रहा है। इस बार निगम कर्मचारियों को जुलाई माह का वेतन भी विलंब से मिला है। नगर निगम को अपने कर्मचारियों को वेतन चुकाने के लिए प्रतिमाह 10 करोड़ रुपए चाहिए। इस भुगतान में प्रतिमाह राज्य सरकार की ओर से 6 करोड़ रुपए चुंगी की एवज में दिए जाते हैं। इसी राशि से निगम के कर्मचारियों की वेतन की नैया पार लग रही है। निगम की गत वर्ष सालाना आय 2 अरब 81 लाख रही थी। इस हिसाब से निगम को प्रतिमाह 23 करोड़ रुपए की दरकार है। पिछले कुछ महीनों से निगम अपनी आय को लेकर लगातार पिछड़ रहा है। तीन माह में निगम को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है। दूसरी तरफ शहर में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई नहीं होने से लगातार खजाना खाली हो रहा है। वार्डों से डीओ रिपोर्ट आने के बाद भी अधिकारी और कर्मचारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे।

इन मामलों से समझें निगम की अनदेखी

1. अतिक्रमण निरीक्षक ने दुकानों पर डाले शटर


निगम के अतिक्रमण निरीक्षक गोपाल ओझा के संतोषपुरा कच्ची बस्ती (मसूरिया) स्थित घर के बाहर दुकानें बनकर तैयार हो गई। इनपर शटर भी डल गए। निगम कर्मचारी व अधिकारी भी यहां कार्रवाई करने से बच रहे हैं। जबकि तत्कालीन आयुक्त ने उनके अवैध निर्माण पर कार्रवाई करने के आदेश जारी कर दिए थे। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।


2. एक साल से अवैध निर्माण


जालोरी गेट के अंदर नाले के पास पिछले एक-डेढ़ साल से एक भवन मालिक नियमों के विपरीत अवैध निर्माण कर रहा है। निगम अधिकारियों के ध्यान में होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। निगम के सूत्र बताते हैं कि बड़ी अप्रोच के चलते निगम अधिकारी यहां कार्रवाई करने से बच रहे हैं।


3. सेटबेक कवर कर लिया


रेजिडेंसी रोड स्थित सूर्या कॉलोनी में 40 गुणा 60 के प्लॉट पर जी प्लस 1 की अनुमति लेकर अवैध निर्माण चल रहा है। नियमों के विपरीत सेटबेक कवर कर लिया और बेसमेंट भी बना दिया। इसकी शिकायत होने के बाद भी निगम के अधिकारी मौन हैं।


4. अनुमति आवासीय, दुकानें बनाने की तैयारी


जालोरी गेट के अंदर एक आइसक्रीम पार्लर व राजदान मेंशन के पीछे एक भवन मालिक जी प्लस 1 की आवासीय अनुमति लेकर व्यवासियक निर्माण करवा रहा है। यहां बेसमेंट भी बना। हरे पर्दे लगाकर निर्माण कार्य चल रहा है। यहां भी निगम की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई।

जून में गिरा ग्राफ


जून में निगम अधिकारी-कर्मचारी व महापौर में विवाद के चलते निगम को महज 2 करोड़ 70 लाख की आय से ही संतोष करना पड़ा। इसके विपरीत निगम ने मई व जुलाई माह में 6 करोड़ रुपए की आय की। जबकि गत वर्ष की आय के अनुपात में निगम की प्रतिमाह आय 23 करोड़ 45 लाख रुपए होनी चाहिए। एक-डेढ़ माह से प्रभावित रही एम्पॉवर कमेटी की बैठक ने भी निगम को राजस्व का नुकसान किया है।

मामला ध्यान में

जालोरी गेट के अंदर नाले के पास निर्माण की जेईएन रिपोर्ट हो चुकी है। ये मामला उपायुक्त के ध्यान में है। अन्य मामलों को मैं चैक करता हूं।

- दीपक कन्नौजिया, अतिक्रमण प्रभारी, शहर जोन

कार्रवाई रोक दी थी

अतिक्रमण निरीक्षक गोपाल ओझा का कहना है कि यह मकान उनकी मां का है। वैसे यहां अतिक्रमण निरीक्षक ओझा ही कार्य करवा रहे हैं। तत्कालीन आयुक्त ने कार्रवाई के आदेश जारी किए, उसके बाद शहर भर में कार्रवाई रोक दी गई थी।
- राजेश तेजी, अतिक्रमण प्रभारी, सूरसागर जोन

नियमित निर्देश देता हूं

नियमित मीटिंग व यूओ नोट के माध्यम से अनाधिकृत निर्माण रोकने के निर्देश दे रहा हूं। उसके अनुरूप कार्रवाई की जानी चाहिए।

- घनश्याम ओझा, महापौर

अवैध निर्माण पर सख्ती

मेरा कार्य राजस्व एकत्रित करवाना है। अवैध निर्माण पर किसी को नहीं बख्शा जाएगा। सीज के भी आदेश जारी हो रहे हैं।

- दुर्गेश बिस्सा, कार्यवाहक आयुक्त, नगर निगम

तनख्वाह विलंब से मिल रही

हमने पूर्व में तनख्वाह विलंब से मिलने का मुद्दा उठाया था। शुरुआत में वेतन समय पर मिला। उसके बाद फिर से विलंब होने लगा है।

- नरेन्द्र हर्ष, अध्यक्ष, म्युनिसिपल एम्पलॉइज यूनियन जोधपुर

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