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मैडम की कुर्सी चली जाए, हाईकोर्ट की सर्किट बेंच उदयपुर नहीं जाने देंगे

हाईकोर्ट की सर्किट बैंच के विरोध में गुरुवार को रैली निकालेंगे वकील
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मैडम की कुर्सी चली जाए, हाईकोर्ट की सर्किट बेंच उदयपुर नहीं जाने देंगे

जोधपुर. उदयपुर में सर्किट बेंच बनाने के विरोध में गत 21 मई से चल रही अधिवक्ताओं की हड़ताल बुधवार को जारी रही। इस दौरान अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री के जोधपुर दौरे के दौरान रैली निकालने का निर्णय किया। राजस्थान हाईकॉर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रंजीत जोशी ने धरनास्थल पर रैली में भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि जुलूस सुबह साढ़े नौ बजे हाइकोर्ट परिसर से सोजती गेट तक निकाला जाएगा। इस अवसर पर मौजूद मारवाड़ राजपूत सभागाध्यक्ष हनुमान सिंह खांगटा ने समर्थन करते जुलूस के दौरान काले झंडे लेकर निकलने का आह्वान किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि अधिवक्ता सिर्फ काला कोट पहन कर आ जाए, काले झंडे हम लेकर आ जाएंगे। खांगटा ने वकीलों से जोधपुर बन्द कराने का भी आह्वान किया। वहीं अधिवक्ताओं के काम छोडऩे से परेशान पक्षकारों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हाईकोर्ट में पक्षकारों की लगी हुई लाइन किसी अस्पताल के आउटडोर में लगने वाली लाइन का सा आभास करवा रही थी।

हाईकोर्ट में पक्षकारों की लगी लाईन

हाईकोर्ट के अवकाशकालीन पीठ के बाहर काफी संख्या में पक्षकार लाइन बना कर खड़े दिखे। वेकेशनल कोर्ट में 3 सौ से अधिक मुकदमे सूचीबद्ध हैं। दोपहर के एक बजे के बाद कायदे से कोर्ट का समय पूरा हो चुका है, लेकिन हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ में अवकाशकालीन कोर्ट के आगे करीब सौ से अधिक पक्षकार लाइन में बैठे अपनी बारी आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। डॉ जस्टिस पीएस भाटी जो कि पिछले दो दिनों से कोर्ट समय से दो से ढाई घंटे अधिक समय तक सुनवाई करते हुए न सिर्फ सभी मामलों की सुनवाई कर रहे है, वरन शाम छह बजे तक चैंबर में बैठ कर आदेशों पर भी हस्ताक्षर कर रहे है। बुधवार को मुख्य वाद सूची में करीब 79 मामले सूचीबद्ध थे। इतना ही नहीं बुधवार सुबह कोर्ट शुरू होने के बाद भी करीब चालीस पचास मुकद्दमों की सूची और जारी की गई। अधिकांश मामले जमानत के है, लेकिन ट्रांसफर केसेज, पदोन्नति, स्कूल व कॉलेजों में एडमिशन को लेकर सैकड़ों याचिकाएं दायर हो रही हैं।और निसन्देह सभी मामलों में पक्षकार खुद अपनी पैरवी कर रहे हैं। यह अलग बात है कि सभी मामलों में याचिका की टाइपिंग से लेकर उसमें लगने वाले शपथ पत्र, याचिकाओं में नजीरों के रूप में लिखे जाने वाले कानूनी बिंदु सभी वकीलों की सहायता से हो रहे हैं।