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Jodhpurites बोले-माहौल खराब नहीं होना चाहिए

जोधपुर ( jodhpur news. current news ) .देश में कहीं भी कैसा भी माहौल हो, प्रदेश और शहर का माहौल खराब नहीं होना चाहिए। अपणायत ही यहां की पहचान है और इसी से भाईचारा बना रह सकता है। वल्र्ड हयुमिलिएशन डे ( World Humiliation Day ) पर कॉलेजाइट्स ( collegites ) की यह राय उभर कर सामने आई।
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जोधपुर

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MI Zahir

Jan 02, 2020

Jodhpurites said - the atmosphere should not deteriorate

Jodhpurites said - the atmosphere should not deteriorate

जोधपुर ( jodhpur news. current news ) .विनम्रता, संयम, शांति और अमन का रास्ते से हर समस्या का समाधान हो सकता है। हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। वल्र्ड हयुमिलिएशन डे स्पेशल ( World Humiliation Day ) पर पत्रिका ने जब कॉलेजाइट्स ( collegites ) से बात की तो उनकी यह राय उभर कर सामने आई। उनका कहना है कि अगर आप किसी बात या मुद़्दे पर असहमत हैं तो अहिंसक विरोध दर्ज करवा सकते हैं, लेकिन देश प्रदेश या शहर का माहौल खराब नहीं होना चाहिए।

ध्यान रहे कि देश भर की अधिकतर यूनिवर्सिटीज, कॉलेजेज व हॉस्टल्स में रह रहे स्टूडेंट्स किसी न किसी मुद्दे को लेकर हिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे वहां पढ़ाई का माहौल कम हो गया है और पेरेंट्स के मन में कई तरह की आशंकाएं घर कर गई हैं। इसके उलट जोधपुराइट्स ( jodhpurites ) और विशेषकर कॉलेजाइट्स ( collegites ) इन सबसे दूर केवल पढ़ाई को प्रिफरेंस दे रहे हैं। उनका मानना है कि हंगामे या हिंसा से आज तक किसी मसले का हल नहीं हुआ है।

युवा सामाजिक रहेगा तो माहौल अच्छा रहेगा

जब आप सड़क किनारे बैठे सर्दी से ठिठुरते किसी गरीब को देखते हैं तो आपके मन में किस तरह का ख्याल आता है? यदि आपका मन उसके लिए द्रवित हो जाता है और आपके मन में उसके लिए कुछ करने की भावना पैदा होती है तो यह मानवता है।यदि हमारे मन में उसके लिए कोई भाव पैदा ही नहीं होता है तो आप खुद को उस गरीब की जगह पर रख कर देखिए। आपको इन्सानियत का मतलब समझ में आएगा। भगवान ने दूसरों को महसूस करने की शक्ति सिर्फ इन्सान को दी है। यही शक्ति इन्सान को सबसे अधिक सामाजिक जीव बनाती है। युवा जब तक सामाजिक रहेगा, माहौल अच्छा रहेगा।

वीरेंद्र प्रतापसिंह
मेडिकल स्टूडेंट

एस एन मेडिकल कॉलेज,जोधपुर
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जोधपुर के यूथ का फोकस केवल पढ़ाई पर
आज पूरे देश में हिंसा की आग भड़की हुई है। किसी के पक्ष तो किसी के विपक्ष में हिंसक विरोध हो रहा है, यह सही नहीं है। एेसे तो युवा राह से भटक रहे हैं। इसी गुस्से और आक्रोश ने देश की कई यूनिवर्सिटीज का माहौल खराब कर दिया है। देश भर में कहीं स्टूडेंट्स कॉलेज छोड़ कर जा रहे हैं तो वहां किसी कॉलेज में मारपीट और हिंसा का माहौल है। शुक्र है कि हमारे जोधपुर के यूथ समझदार हैं और वे किसी के बहकावे में नहीं आते। वे समर्थन या विरोध

में किसी तरह के उग्र प्रदर्शन याहिंसा को सही नहीं मानते और केवल पढ़ाई पर फोकस कर रहे हैं। जोधपुर के युवा शांति से रहना पसंद करते हैं। उम्मीद है कि जोधपुर के युवा अपणायत की यह परंपरा कायम रखेंगे।
मिताशा शर्मा

एम ए प्रीवियस, साइकोलॉजी
जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी, जोधपुर

हिंसा हमारी संस्कृति के खिलाफ

व्यक्ति का सबसे बड़ा धर्म मानवता है। आजकल मानवता समाप्त होती जा रही है देश के अंदर जो हिंसक प्रदर्शन, तोडफ़ोड़ व महिलाओं के साथ दुष्कर्म हो रहे हैं, वह निंदनीय है। भारतीय संविधान हमें विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है, लेकिन इसका तात्पर्य यह नहीं कि हम हमारे देश की संपत्ति व प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाएं। वर्तमान में कई युवा अहिंसक मार्ग को छोड़ कर हिंसक मार्ग को अपना रहे हैं जो हमारी भारतीय संस्कृति के खिलाफ है। आज हमारे देश की हवा में कड़वाहट का जहर इस तरह घुल रहा है कि हम यह भूल गए हैं कि हम पहले एक भारतीय हैं। अन्य क्षेत्रों की तुलना में हमारे जोधपुरवासी सौहार्द व वसुधैव कुटुंबकम् की धारणा में विश्वास करते हैं। पुलिस व प्रशासन भी सजग है। यह हम सब के लिए गर्व की बात है।

-यथार्थ सागर
एम ए फाइनल पॉलिटिकल साइंस

जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी, जोधपुर
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अपना कर्तव्य बखूबी निभाएं

एक विद्यार्थी का पहला धर्म पढ़ाई करना है। उसके बाद दूसरी चीजें हैं। माना कि समसामयिक घटनाचक्र पर हमें अपनी राय रखने और सहमत व असहमत होने का अधिकार है, लेकिन हमें हिंसा या खून खराबा करने का अधिकार नहीं है। आपकी असहमति का स्तर हिंसा के लेवल तक नहीं पहुंचना चाहिए। आप अपनी बात उचित माध्यम से और शांति से भी रख सकते हैं। मानव जीवन एक दुर्लभ मौका है कुछ श्रेष्ठ करने का ,किसी की मदद करने का। प्रत्येक इंसान का धर्म है मानवता जोकि किसी भी जाति ,धर्म इत्यादि भावनाओं से ऊपर होना चाहिए। इसलिए यदि हमारे थोड़े से प्रयास से किसी की जान बच सकती है तो वह प्रयास करके हमें अपना कर्तव्य बखूबी निभाना चाहिए।

-अक्षी विजय

मेडिकल स्टूडेंट

एस एन मेडिकल कॉलेज, जोधपुर

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यह है वल्र्ड हयुमिलिएशन डे

वल्र्ड हयुमिलिएशन डे की तानाशाही के लिए कुख्यात चीन से यह दिन मनाने की शुरुआत हुई है थी और आज दुनिया भर में यह दिन मनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। यह दिन यह संदेश देता है कि शोषण को कैसे रोका जा सकता है। शोषण को रोकने के लिए कैसे कदम उठाए जाने चाहिए और आम लोगों को यह संदेश भी देता है कि वे विनम्र व संयमशील बनें और लोगों के मानवाधिकारों व मानवता का सम्मान करें। इससे शोषण खत्म हो जाएगा।