जस्टिस लोढ़ा के फैसले ने खोली सुनियोजित विकास की राह

राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रशासन शहरों के संग अभियान को लेकर अहम दिशा-निर्देश दिए

By: Jay Kumar

Published: 06 Oct 2021, 08:34 PM IST

दिनेश बोथरा/जोधपुर। अपने चौदह साल के न्यायिक कॅरिअर में अदालती कार्यवाही के अंतिम दिन राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा ने प्रशासन शहरों के संग अभियान को लेकर अहम दिशा-निर्देश दिए। वे हालांकि 12 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होंगे, लेकिन नवरात्रा अवकाश के चलते बुधवार को कोर्ट में बतौर न्यायाधीश मामलों की सुनवाई का उनका अंतिम दिन था।

वर्ष 1983 में वकालत के पेशे में आए लोढ़ा को 5 जुलाई, 2007 को हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। वर्तमान में लोढ़ा मुख्य न्यायाधीश के बाद सबसे वरिष्ठ जज है और राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष भी है। न्यायाधीश के तौर पर उनके कई फैसले बहुचर्चित रहे हैं। पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की पत्र याचिका में शहरों के सुनियोजित विकास, प्राकृतिक संसाधन, जल स्रोत-नदी-झील, पर्यावरण, सार्वजनिक भूमि के संरक्षण व संवर्धन को लेकर उनके विस्तृत फैसले की नजीर सैकड़ों न्यायिक आदेशों में दी जाती है। इस पत्र याचिका की लंबी सुनवाई के बाद न्यायाधीश लोढ़ा का निर्णय न केवल शहरी नियोजन से जुड़े हर पहलू पर निर्देशिका बना, बल्कि इसके बाद ही शहरों के मास्टर प्लान के जमीनी क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त हो पाया। राज्य पक्षी गोडावण के संरक्षण की कागजी कवायद पर संज्ञान लेते हुए न्यायाधीश लोढ़ा ने ही जनहित याचिका दर्ज करते हुए सुनवाई शुरू की। हाल ही राज्य झील विकास प्राधिकरण को अपने दायित्वों का बोध करवाते हुए उनकी खंडपीठ ने समयबद्ध निर्देश जारी किए। न्यायिक राजधानी जोधपुर के समन्वित विकास के लिए उन्होंने कई कड़े आदेश पारित किए। चाहे संक्रामक रोग संस्थान को लेकर उपेक्षा का मामला हो या मंडोर उद्यान को लेकर अनदेखी का आलम, कमोबेश हर महत्वाकांक्षी योजनाओं को लेकर बजट जारी करने की सरकारी अड़चनों को दूर करने में उनके आदेशों ने विशेष भूमिका निभाई। जोधपुर शहर में नागरिक विमानन सेवाओं को पंख लगाने और एयरपोर्ट विस्तार में न्यायाधीश लोढ़ा का हस्तक्षेप हमेशा याद किया जाएगा। गांवों में ओरण, गोचर, नदी-तालाब और सार्वजनिक भूमियों के संरक्षण, उन्हें अतिक्रमण मुक्त करने सहित उनके नियम विरुद्ध आवंटन के खिलाफ उनके कई निर्णय मिसाल बनकर सामने आए हैं। उन्होंने जेल में कैद बंदियों के न्यूनतम मजदूरी में इजाफे को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए।

Jay Kumar
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