10 अगस्त 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

जोधपुर
कोरोना का साया पड़ा तो अपनी नृत्य कला को जीवित रखने के लिए मिलाई ऑनलाइन ताल
Play video

कोरोना का साया पड़ा तो अपनी नृत्य कला को जीवित रखने के लिए मिलाई ऑनलाइन ताल

- सूआ देवी कालबेलिया झुग्गी झोपडी में रहने वाली बालिकाओं को सीखा रही नृत्य- देशी-विदेशी महिलाओं को ऑनलाइन कालबेलिया नृत्य सीखा अर्जित कर रही आय- अपनी आय से जरूरतमंद लोक कलाकारों की कर रही मदद
Google source verification

जेके भाटी/जोधपुर. ‘डर मुझे भी लगा फासला देखकर, पर मैं बढ़ती गई रास्ता देखकर, खुद-ब-खुद मेरे नजदीक आती गई, मेरी मंजिल मेरा हौसला देखकर’ यह कहना है शहर से निकलकर पूरे विश्व में राजस्थानी लोकनृत्य कालबेलिया से ख्याति प्राप्त करने वाली नृत्यांगना सूआ देवी कालबेलिया का।

सूआ देवी ने मार्च माह से कोरोना महामारी का प्रकोप बढऩे पर अपने सारे कार्यक्रम स्थिगित होने के बाद कुछ अलग करने की सोची और अपनी कला को जीवित रखने के लिए अपने परिवार व आस-पास की झुग्गी झोपड़ी में रहने वाली छोटी बालिकाओं के लिए निशुल्क कालबेलिया नृत्य की कक्षाएं लेना शुरू कर दिया। वे अपने घर पर प्रतिदिन शाम पांच बजे से सात बजे तक बीस बालिकाओं को राजस्थान की कला व संस्कृति का ज्ञान देने के साथ नृत्य में माहिर भी कर रही हैं।

कोविड-19 के कहर में साथी कलाकारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा होने पर उन्होंने देश-विदेश में अपने से जुडी बालिकाओं व महिलाओं को ऑनलाइन कालबेलिया नृत्य सिखाना शुरू किया और उससे प्राप्त राशी से जरूरतमंद लोक कलाकारों की सहायता करने लगी।

विदेशी महिलाओं की पसंद कालबेलिया नृत्य
सूआ देवी ने बताया कि राजस्थान की लोक संस्कृति व कालबेलिया नृत्य अपनी पोशाक व नृत्य के अनूठे तरीके के कारण अमेरिका, लंदन, फ्रांस, मेक्सिको व यूरोप सहित विभिन्न देशों में जाना जाता हैं। यह कला विदेशी महिलाओं को इतना मोहित करती है कि वे इसे सीखने के लिए उत्साहित रहती हैं। विदेशी महिलाएं मुंह से पैसे उठाना, आंखाों की पलक से अंगूठी उठाना, उल्टी चकरी खाना व सांप की तरह बल खाने की कलाबाजी को सीखने के लिए संपर्क करती हैं। कोरोना काल में इस कला को जीवित रखने के लिए बच्चियों को शिक्षा दी जा रही हैं। जिससे आगामी पीढ़ी में दर्शकों व श्रोताओं के दिल व दिमाग में राजस्थान की संस्कृति अंकित रहें।

लोक कलाकारों के लिए बने बोर्ड
कालबेलिया नृत्य को ना केवल देश, बल्कि विदेशों में भी पहचान दिलाने वाली नृत्यांगना सूआ देवी अपने साथी लोक कलाकारों के सामने खड़े हुए संकट के लिए संघर्ष कर रही हैं। वे कहती है कि बॉलीवुड जैसी जगह पर कोरोना संकट को लेकर सब चिंता कर रहे है, लेकिन लोक कला को बचाने के लिए कोई नहीं सोचता। राज्य सरकार को लोक कला व कलाकारों के लिए बड़ा कदम उठाना चाहिए। प्रदेश में लोक कलाकारों के लिए बोर्ड बनाकर उनकी समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। कोरोना काल में लोक गायक व विभिन्न कलाकारों के सामने कार्यक्रम बंद होने से परेशानी खड़ी हो गई है। ऐसे में कलाकार अपनी कला को छोडक़र पत्थरों की खान में मजदूरी करने को विवश हो रहे हैं। राज्य सरकार को राजस्व आय से ऐसे लोक कलाकारों की मदद करनी चाहिए। जिससे वे अपनी लोक कला को जीवित रखते हुए आगामी पीढ़ी को सीखा सकें।