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KBC 2023: छा गई राजस्थान के अरना-झरना संग्रहालय की पुरुष और महिला झाड़ू, केबीसी में पूछा गया ये सवाल

KBC 2023: जोधपुर शहर के अरना झरना मरु संस्कृति संग्रहालय में प्रदर्शित महिला व पुरुष झाड़ू टेलीविजन पर प्रसारित कौन बनेगा करोड़पति (केबीसी) में पूछे गए सवाल से चर्चित हो गया है।

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जोधपुर शहर के अरना झरना मरु संस्कृति संग्रहालय में प्रदर्शित महिला व पुरुष झाड़ू टेलीविजन पर प्रसारित कौन बनेगा करोड़पति (केबीसी) में पूछे गए सवाल से चर्चित हो गया है। केबीसी में 25 लाख के लिए 'राजस्थान में अरना झरना संग्रहालय में अंदर व बाहर के उपयोग के लिए महिला व पुरुष के रूप में प्रदर्शित किन वस्तुओं का एक व्यापक संग्रह है' जैसा सवाल पूछा गया। जिसके चार विकल्प में झाड़ू तीसरा विकल्प था। लेकिन प्रतिभागी सही जवाब नहीं दे पाए। गौरतलब है कि पद्मभूषण कोमल कोठारी के बनाए इस संग्रहालय में राजस्थान के अनेक गांवों से एकत्र की गई 180 से अधिक किस्मों की झाडू हैं। ऐसे में यहां आने वाले देसी-विदेशी पर्यटकों में ये 'झाड़ू संग्रहालय' के नाम से लोकप्रिय है।

पुरुष और महिला झाड़ू अलग-अलग

घरों के बाहरी हिस्से में उपयोग की जाने वाली 'पुरुष' झाड़ू (बुंगरा और हवार्नो) और घरों के अंदर 'महिला' झाड़ू (बुरी और हवार्नी) का उपयोग किया जाता है। उनकी बनावट, आकार और घास उपयोग के अनुसार अलग-अलग होते हैं। 'पुरुष' झाड़ू बाहर की सख्त सतहों के लिए बनाई जाती हैं और 'महिला' झाड़ू घर के अंदर की नरम और विस्तृत सतहों के लिए बनाई जाती हैं। झाड़ू के लिए सतह घास का प्रकार तय करती है। सड़क के किनारे बांस की झाडू लगाई जाती है। जयपुर से बनी झाडू बन्नी (स्थानीय घास) की टहनियों से बनती है और ताड़ से बनी झाडू मेवाड़ से आती है।


संग्रहालय की यह है खासियत

कोमल कोठारी के बेटे और संग्रहालय चलाने वाले रूपायन संस्थान के सचिव कुलदीप कोठारी ने बताया कि इस संग्रहालय के लिए विभिन्न प्रांतों, गांवों, कस्बों व नगरों में जाकर इस्तेमाल में आने वाली रोजमर्रा की झाड़ू, उससे जुड़े किस्सों, रीति-रिवा•ाों, अंधविश्वासों, परंपराओं व व्यवहारों की जानकारी जुटाई गई। यहां प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में बसे लोक समाजों में इस्तेमाल होने वाली विभिन्न तरह की झाड़ू प्रदर्शित की हुई है। उन्होंने बताया कि राजस्थान में तीन प्रमुख खाद्य क्षेत्र में दो-तिहाई हिस्से में बाजरा, इसके बाद मक्का और पूर्वी राजस्थान के कुछ भागों में ज्वार उगाया जाता है। संग्रहालय को भी इन खाद्य क्षेत्रों के आधार पर तीन भागों में बांटा गया है। प्रदर्शित झाडू इन खाद्य क्षेत्रों में उगने वाली घास से बनाई गई हैं, इसलिए प्रत्येक की उस क्षेत्र की मूल बनावट, डिजाइन और शैली यहां मौजूद है।

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