
ker sangri- popular Rajasthani delicacies
बिलाड़ा/जोधपुर। मारवाड़ का मेवा कहलाने वाले कैर, कुमटिया और सांगरी देश में ही नहीं विदेश में भी मारवाड़ी व्यंजनों का पर्याय बन चुकी है। इन दिनों मांग काफी अधिक होने के कारण कैर, सांगरी, और कुमट के भाव भी काफी तेज हो चुके हैं। बावजूद इसके देश के कई हिस्सों और विदेशों में इसकी मांग होने से लोगों के लिए अब ये रोजगार का साधन बन चुके हैं। इसे मारवाड़ का मेवा माना जाता है। अचार और सब्जी दोनों तरीके से इसे पसंद किया जाता है। शादी या समारोह में ये सब्जी विशेष रूप से बनाई जाती है। सफर के दौरान भी इस सब्जी को साथ में लिया जाता है, क्योंकि ये सब्जी काफी दिनों तक खराब नहीं होती।
कृषि विज्ञान केन्द्र देता है प्रशिक्षण
कैर, सांगरी आदि के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र की ओर से बेरोजगारों को फल सब्जी प्रशिक्षण दिया जाता है। ग्रामीण क्षेत्र के बेरोजगारों को कैर व सांगरी सुखाने और अचार बनाने के लिए विधि सिखाई जाती है। हालांकि इसे बढ़ावा देने के लिए सरकार की तरफ से कोई इंतजाम नहीं है। ना ही सरकार ने कोई योजना ही बनाई है। जोधपुर जिले के कई गांवों में ग्रामीणों को कैरों को चुनते और देशी बबूल पर लटक रही कुमट की फलियों को तोड़ते आसानी से देखा जा सकता है।
तपती है धरा तो खिलते हैं फूल
मारवाड़ में जैसे-जैसे पारा चढ़ना शुरू होता है वैसे ही कैर के फूलों से झाड़ियां लकदक हो जाती हैं। फरवरी के बाद से फूलों में बढ़ोतरी शुरू हो जाती है और अप्रेल आते आते झाड़ियों में कैर आना शुरू हो जाते हैं। वहीं राजस्थान के कल्पवृक्ष के रूप में मानी जाने वाली खेजड़ी पर भी सांगरी का आना शुरू हो जाता है।
12 सौ से 14 सौ रु प्रति किलो है भाव
बाजार में सूखे मेवे काजू, बादाम के भाव जहां पांच सौ रूपये प्रति किलोग्राम है, वहीं सूखे कैर पैकिंग के बाद 12 सौ से 14 सौ रूपये प्रति किलोग्राम के भाव बिक रहे हैं। वहीं गीले कैर कीमत 20 रूपये प्रति किलो है। जोधपुर जिले से इनका निर्यात कनार्टक, आन्धप्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र्र, पश्चिम बंगाल, नई दिल्ली के अलावा विदेशों तक में होता है।
Updated on:
29 Mar 2018 03:13 pm
Published on:
29 Mar 2018 02:59 pm
बड़ी खबरें
View Allजोधपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
