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राजस्थान में स्टेट गैराज की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने हेलमेट पहनकर पहुंची पुलिस, 8 दुकानें ध्वस्त

स्टेट मोटर गैराज यूनियन के पदाधिकारियों ने बताया कि पिछले कई वर्षों से कुछ दुकानदार अवैध रूप से यूनियन की जमीन पर कब्जा करके बैठे थे और इसके लिए हम लगातार कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।

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पुलिस से उलझती महिला (फोटो- पत्रिका)

राजस्थान के जोधपुर में स्टेट मोटर गैराज वाहन चालक यूनियन की जमीन पर वर्षों से काबिज दुकानदारों पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद मंगलवार को स्टेट मोटर गैराज के अधिकारियों ने नगर निगम के साथ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। रातानाडा चौराहे पर भारी पुलिस जाप्ते के साथ निगम दस्ते ने 8 दुकानों को ध्वस्त किया। हालांकि कार्रवाई के दौरान ही दुकानदार कोर्ट पहुंचे तो कोर्ट ने निगम को आदेशित किया कार्रवाई जहां तक हुई वहां रोक दें। दुकानदारों को सामान निकालने का समय दिया। कोर्ट में इस मामले की सुनवाई बुधवार को होगी।

जमीन पर किया था कब्जा

स्टेट मोटर गैराज यूनियन के पदाधिकारियों ने बताया कि पिछले कई वर्षों से कुछ दुकानदार अवैध रूप से यूनियन की जमीन पर कब्जा करके बैठे थे और इसके लिए हम लगातार कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। हाईकोर्ट के आदेश के बाद मंगलवार को यह कार्रवाई की गई। अतिक्रमण हटाने के कार्रवाई शुरू होने के साथ ही दुकानदार में हड़कंप मच गया। उन्होंने आनन फानन में दुकानों में रखे सामान को हटाया। मामला लंबे समय तक न्यायालय में चला। कार्रवाई के दौरान दुकानदारों का सामान अंदर ही था और निगम ने निर्माण कार्य को ध्वस्त कर दिया।

पार्षद ने किया विरोध

स्थानीय पार्षद ललित गहलोत ने कार्रवाई का विरोध किया। गहलोत ने कहा कि लोगों को सामान हटाने का समय दिया जाना चाहिए था, लेकिन निगम ने उन्हें समय नहीं दिया। आखिरकार पुलिस मामला बढ़ता देख गहलोत को अपने साथ ले गई। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में दुकानदार और स्थानीय लोग अपना सामान हटाते हुए नजर आए।

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सुरक्षा का रखा ध्यान

उम्मेद सागर के कैंचमेंट इलाके में कार्रवाई के दौरान पुलिस का अनुभव अच्छा नहीं रहा। इसके चलते मंगलवार को जब निगम के साथ पुलिस का जाप्ता स्टेट गैराज की जमीन से अतिक्रमण हटाने पहुंचा तो जाप्ते में शामिल सभी पुलिसकर्मियों के सिर पर हेलमेट के साथ सुरक्षा के सभी इंतजाम साथ थे।

यह था मामला

यह जमीन 1 जनवरी 1931 को स्टेट गैराज ड्राइविंग के प्रयोग के लिए दी गई थी। यहां बड़ी संख्या में ड्राइवर बैठते थे। इसके बाद यहां राजस्थान राज्य वाहन चालक एवं तकनीकी कर्मचारी संघ का कार्यालय बनाया गया, लेकिन कुछ समय बाद यहां आस-पास की दुकानों पर अतिक्रमण हो गया।

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