जोधपुर की लता ने छोड़ी रईसी की जिंदगी

जोधपुर में जन्मी संपन्न परिवार की लता कच्छवाह एकल महिला है। एम.ए इतिहास करने के बाद सामाजिक कार्य की ललक के चलते बाड़मेर आ गई।

By: Avinash Kewaliya

Published: 07 Mar 2021, 11:16 PM IST

जोधपुर.

जोधपुर में जन्मी संपन्न परिवार की लता कच्छवाह एकल महिला है। एम.ए इतिहास करने के बाद सामाजिक कार्य की ललक के चलते बाड़मेर आ गई। 1984-85 में उन्होंने समाजसेवा शुरूकी। यहां पुरुष वर्चस्व में महिलाओं के लिए काम करना मुश्किल था। उन्होंने सोच दी कि घर की देहरी में ही काम दिया जाए। पाकिस्तान से आई महिलाओं के पास कशीदाकारी का हुनर तो था लेकिन दाम महज दिन के तीन रुपए मिल रहे थे। सामाजिक संगठन के जरिए उन्होंने बीजराड़ में श्योर संस्थान के सेंटर के साथ कार्य प्रारंभ किया और 10 हजार से अधिक महिलाओं को जोड़ लिया। 671 स्वयं सहायता समूह के माध्यम से रोजगार दे रही है। इन महिलाओं को अब उनके बनाए उत्पाद का दाम मिलने लगा और पिछले चार दशक से ये महिलाएं अपने घर बैठे रोजगार प्राप्त कर रही है और नई पीढ़ी जुड़ती जा रही है।
दस्तकारी सामग्री की बिक्री में अब दिल्ली, मुम्बई, जयपुर, बैंगलोर, चण्डीगढ़, मद्रास के अलावा अमेरिका सिंगापुर, थाईलैंड, बांगलादेश, श्रीलंका तक पहुंचकर उन्होंने दस्तकारी को बाजार दिलवाया है।

कच्छवाह ने कहा कि विभिन्न फर्म एवं बड़े-बडे प्रतिष्ठान सामान को आजकल ऑनलाईन तरीके से खरीदना पसंद करते है। विशेषकर कोविड-19 की वजह से इन सामग्री की ऑनलाइन डिमाण्ड ज्यादा होने लगी इसलिए महिलाओं एवं उनके परिवार जनो में किसी एक सदस्य को जो इसको समझ सके को इसकी जानकारी देकर ऑनलाइन से जोड़ा गया और सामग्री प्रदर्शनी लगाई गई तथा इसके माध्यम से सामग्री बेची गई।

Avinash Kewaliya
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