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गजेन्द्र सिंह दहिया/जोधपुर. अब तक के भू-विज्ञान सिद्धांत के अनुसार 750 से लेकर 65 मिलियन वर्ष के दौरान राजस्थान में कहीं भी ज्वालामुखी विस्फोट के प्रमाण नहीं मिले हैं, लेकिन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT Bombay) के हालिया अनुसंधान में सामने आया है कि राजस्थान में 88 मिलियन वर्ष और 110 मिलियन वर्ष पहले भी ज्वालामुखी उद्गार से मेग्मा जमीन से बाहर आया था। ऐसे में वैज्ञानिक संभावना भी जता रहे हैं कि प्रदेश में कुछ लाख साल पहले भी ज्वालामुखी विस्फोट हुए होंगे। ज्वालामुखी क्रिया के नए प्रमाण मिलने के बाद राजस्थान के पृथ्वी विज्ञान सिद्धांत में अब बदलाव करना पड़ेगा। साथ ही ज्वालामुखी विस्फोट के नए प्रमाण मिलने से नए खनिज लवण मिलने और उनके भण्डारण क्षमता का अनुमान लगाने में और अधिक आसानी होगी। गौरतलब है कि वर्तमान में यह धारणा है कि उत्तरी भारत में अंतिम ज्वालामुखी विस्फोट 65 मिलियन वर्ष पहले हुआ था।
सिरोही और बाड़मेर में मिले ज्वालामुखी प्रमाण
IIT Bombay के पृथ्वी विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. हेतू सेठ के निर्देशन में एक टीम ने सिरोही के मांडवाड़ा और बाड़मेर के सरणु डंडाली में 110 और 88 मिलियन वर्ष पहले ज्वालामुखी विस्फोट के प्रमाण खोजे हैं। दक्कन ट्रेप से लगती यहां की चट्टानों में पुरानी बेसाल्ट चट्टानें मिली हैं। इससे उस दौरान मिलने वाले खनिजों की तुलनात्मक खोज के संदर्भ में उत्तरी भारत में भी बढ़ा जा सकेगा।
यह है घटना
पृथ्वी पर 335 मिलियन वर्ष पहले केवल एक ही महाद्वीप (एक ही भूखण्ड) पेंजिया हुआ करता था। इसके चारों तरफ टेथिस सागर था। करीब 170 मिलियन वर्ष पहले यह दो भागों अंगारालैण्ड और गोण्डवाणा लैण्ड में टूट गया और इनके मध्य टेथिस सागर आ गया। भारत अफ्रीका, दक्षिण अमरीका, ऑस्ट्रेलिया और अण्टार्कटिका के साथ गोण्डवाणा लैण्ड का हिस्सा था। करीब 100 मिलियन वर्ष पहले भारतीय प्लेट, मेडागास्कर प्लेट से अलग होनी शुरू हो गई और आगे उत्तरी-पूर्वी दिशा में 20 सेंटीमीटर प्रति वर्ष की गति से एशिया की तरफ बढ़ी। दोनों प्लेटों के अलग होने के दरम्यान राजस्थान में कई ज्वालामुखी विस्फोट होने के प्रमाण अब मिले हैं। करीब 55 वर्ष पहले भारतीय प्लेट एशिया की यूरेशियन प्लेट से जा टकराई। भारतीय प्लेट का अधिक घनत्व होने के कारण यूरेशियन प्लेट मुड़ती गई और हिमालय का निर्माण हुआ। वर्तमान में भी भारतीय प्लेट 4 सेमी प्रति वर्ष की गति से यूरेशियन प्लेट का टक्कर मार रही है और हिमालय की ऊंचाई बढ़ती ही जा रही है।
ज्वालामुखी के नए प्रमाण मिले हैं
सिरोही और बाड़मेर में 110 और 88 मिलियन वर्ष पहले ज्वालामुखी क्रिया के प्रमाण मिले हैं। अब तक यह माना जाता था कि प्रदेश में पहला ज्वालामुखी विस्फोट 750 मिलियन वर्ष पहले और दूसरा प्रमाण 65 मिलियन वर्ष पहले हुआ था। इस बीच में मेग्मा उद्गार के कोई परिणाम नहीं मिले हैं। इससे पृथ्वी विज्ञान के नए सिद्धांत बनाने में मदद मिलेगी।
प्रो. हेतू शेठ, पृथ्वी विज्ञान विभाग, IIT Bombay
Updated on:
23 Nov 2018 03:13 pm
Published on:
23 Nov 2018 03:13 pm
