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लौट आओ मां, मेरा क्या कसूर, मुझे क्यों छोड़ चली गईं

-कौन है वो मां, जिसने कलेजे पर रखा पत्थर -छह दिन की प्री मैच्योर नवजात की हालत नाजुक

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Laut Aao Maa : Come back soon, New Born Baby calling to her mother

लौट आओ मां, मेरा क्या कसूर, मुझे क्यों छोड़ चली गईं

-Human Story--

जोधपुर.

छह दिन पहले जन्मी प्री-मैच्योर नवजात उम्मेद अस्पताल की नवजात सघन चिकित्सा इकाई(एनआईसीयू) में भर्ती हैं...लेकिन उसे जन्म देने वाली मां पास नहीं है। नन्हीं जान के हाथ हिलते हैं तो ऐसे लगता है कि वह अपनी मां को ही पुकार रही है... लौट आओ मां..., मेरा क्या कसूर है..., मुझे क्यों छोड़कर चली गई...। मां तो मां होती है, इसलिए मां को कोस नहीं सकते। मां की भी कोई मजबूरी रही होगी कि उसे अपने कलेजे के टुकड़े को यूं ही छोड़कर जाना पड़ा। दिल पर पत्थर रख मां पता नहीं कहां चली गई? अकेले में मन ही मन उसका भी रो-रोकर बुरा हाल हो रहा होगा। उस मां को उसका मन ही धिक्कार रहा होगा कि वह कैसी मां है, जिसने पहली संतान के रूप में सात माह तक कोख में रखा और कुछ ही पलों में उसे ठुकरा दिया। उस मां के मन में महसूस हो रहा होगा कि उसकी नन्हीं जान अस्पताल में उसके बिना किस तरह तड़प रही होगी, उसे पुकार रही होगी। जन्म देने वाली मां के बिना नन्हीं जान कैसे दूध पीएगी और कैसे जी पाएगी..?


वजन कम, नाक के जरिए दे रहे फीड

आईसीयू में भर्ती नवजात का वजन एक किलोग्राम है। उसके जीवन के छह दिन निकल चुके हैं। मां का दूध नहीं मिलने के कारण उसे नाक की नली के जरिए हर दो घंटे में नेसोगेस्ट्रिक फीड दिया जा रहा है। साथ ही एन्टीबॉयोटिक दी जा रही है। गौरतलब है कि नवजात की केयर करने में उम्मेद अस्पताल पूरे प्रदेश में अव्वल रहा है और सेन्टर फॉर एक्सीलेंस घोषित हुआ है। इससे पहले डॉ. हरीश मौर्य के प्रयासों से 800 ग्राम के बच्चों की केयर करने में भी रिकॉर्ड रह चुका है। अस्पताल प्रशासन ने इसकी केयर के लिए चौबीस घंटे नर्सिंग स्टाफ को जिम्मेदारी दे रखी है। बाल कल्याण समिति के बाल सुरक्षा गृह की ओर से भी एक केयर टेकर लगाई गई है।


ऐसे लाए थे और फिर चले गए

आठ अगस्त की सुबह चार बजे तीन-चार व्यक्ति एक नवजात बच्ची को तबीयत ठीक नहीं होने पर अस्पताल लेकर आए। जो सात माह की प्री मैच्योर है और एक दिन पहले ही किसी अन्य अस्पताल में उसका जन्म हुआ था। डॉ. राकेश जोरा के अनुसार लेबर रूम तक बच्ची की मां साथ रही। महिला की यह पहली संतान है। जांच के बाद नवजात बच्ची को आईसीयू में भर्ती कर लिया गया। भर्ती कागज में मां का नाम गीता पत्नी दशरथ और जोधपुर में नेवरा कलां नाम लिखाया गया। आठ अगस्त को दिन व रात भर उसका इलाज कराया गया। साथ आने वाले वार्ड के बाहर मौजूद थे। फिर दूसरे दिन नौ अगस्त की सुबह बच्ची के साथ आने वाले परिजन एक-एक करके अस्पताल से निकल गए। काफी देर तक परिजन का इंतजार करने के बाद नर्सिंग स्टाफ ने अस्पताल व बाहर तलाश के प्रयास किए, लेकिन उनका कोई पता नहीं लगा।


एफआईआर कराई, फर्जी निकले नाम-पते

एक दिन तक इंतजार करने के बाद शनिवार को अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को सूचना दी। अस्पताल अधीक्षक डॉ. रंजना देसाई की तरफ से बतौर पिता दशरथ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने नाम व पते के आधार पर नेवरा कलां गांव में तलाश के प्रयास किए, लेकिन वहां इस नाम से कोई भी व्यक्ति नहीं मिला। जो पता लिखा, वह भी फर्जी निकला।


आखिर कब सुधरेंगे सीसीटीवी कैमरे

पुलिस ने बच्ची को छोड़कर जाने वालों का पता लगाने के लिए अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने के प्रयास किए, लेकिन कैमरे बंद होने से पुलिस को निराशा हाथ लगी। पुलिस का कहना है कि कई बार अस्पताल प्रशासन को लिखित में अवगत कराने के बावजूद कैमरे बंद हैं।