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जोधपुर संभाग के वनक्षेत्रों में सीमांकन के लिए बजट ऊंट के मुंह में जीरा

एक दशक से अधूरा पड़ा है सीमा स्तंभ लगाने का कार्य
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जोधपुर संभाग के वनक्षेत्रों में सीमांकन के लिए बजट ऊंट के मुंह में जीरा

जोधपुर संभाग के वनक्षेत्रों में सीमांकन के लिए बजट ऊंट के मुंह में जीरा

जोधपुर. संभाग के वनमंडलों की बेशकीमती वनभूमि पर सीमा स्तंभ नहीं होने से अतिक्रमण, खनन और वन अपराधों की लगातार शिकायतों के बावजूद आधे से अधिक वनसीमाओं का सीमांकन कार्य अधूरा पड़ा है। नतीजन वनभूमि पर असमंजस की स्थिति के चलते वनसंपदा और वनभूमि की लूट जारी है। वनसीमाओं के अभाव में जोधपुर वन मंडल की भूमि पर लगातार अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। वन अपराधी वन क्षेत्रों पर कब्जा कर पर्यावरण को खासा नुकसान पहुंचा चुके है। यह नुकसान बदस्तूर जारी है। वन भूमि की पहचान व सुरक्षा के लिए वन भूमि का सीमांकन वन सीमा पर वन सीमा स्तम्भ लगाने के लिए भी नाम मात्र बजट दिया जा रहा है।
संभाग में 30 हजार सीमा स्तंभ की जरूरत
राज्य की वन भूमि की सीमा पर 2 लाख 83 हजार 943 वन सीमा स्तम्भ लगाए जाने है जिनमें से पिछले साल तक 1 लाख 11 हजार 542 वन सीमा स्तम्भ लगाये जा चुके हैं जबकि 1,72,401 वन सीमा स्तम्भ लगाये जाने शेष हैं । जोधपुर वनमंडल में 23650 हेक्टेयर वन भूमि को संरक्षित करने के लिए करीब तीस हजार से अधिक सीमा स्तंभ की जरूरत है लेकिन पिछले दस सालों के दौरान कार्य पूरा नहीं हो पाया है। इस कारण वन भूमियों पर बस्तियों की संख्या और वनक्षेत्रों में लगातार खनन से पर्यावरण को क्षति पहुंच रही है।
जोधपुर पाली के लिए नहीं मिला बजट
जोधपुर संभाग के वन मंडलों में इंदिरागांधी नहर परियोजना क्षेत्र में 318 सीमा स्तंभ के लिए 4 लाख 27 हजार, सिरोही में 200 पिलर्स के लिए 1 लाख 90 हजार तथा जालोर में 300 सीमा स्तंभ के लिए 2 लाख 41 हजार खर्च किए गए। जबकि सर्वाधिक संवेदनशील माने जाने वाले जोधपुर, पाली व जैसलमेर के लिए कोई बजट आवंटित नहीं किया गया।
सुरक्षा दीवारें बने तो बेहतर
संभाग की वनभूमि को संरक्षित करने के लिए मिलने वाला बजट कम है। यदि सीमा स्तंभ की जगह वन क्षेत्रों में पक्की सुरक्षा दीवारों का निर्माण करवाया जाए तो सीमा स्तंभ की तुलना में कही बेहतर हो सकता है। इस बारे में प्रस्ताव बनाकर जल्द ही मुख्यालय को भेजा जाएगा।
एसआरवी मूर्थि, मुख्य वन संरक्षक जोधपुर संभाग