
Combination of Ayurveda and Allopathy can cure cancer
जोधपुर. एलोपैथी में डायबिटीज रोग को दो प्रकार टाइप-1 और टाइप-2 माना गया है, जबकि आयुर्वेद में डायबिटीज के 15 उप प्रकार होते हैं। जिनका उपचार प्रकृति के सिद्धांतों के आधार पर किया जाता है। वर्तमान में आयुर्वेद में व्यक्तिगत उपचार में काफी समय लग जाता है। इसको देखते हुए आयुर्वेद चिकित्सा को भी अब तकनीकB से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जोधपुर में आयुर्टेंक का सेंटर ऑफ एक्सीेलेंस खोलने की मंजूरी दी है। यहां आइआइटी और डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन् राजस्थान आयर्वेद विश्वविद्यालय मिलकर शोध करेंगे और आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुरुप मेडिकल डिवाइस पर तकनीकB विकसित करेंगे। इससे आने वाले सालों में आयुर्वेद के वैद्य केवल नाड़ी देखकर ही इलाज नहीं करेंगे, उनके पास भी एलोपैथी की एक्स-रे, सीटी स्कैन जैसी अत्याधुनिक मेडिकल मशीनों की जांच रिपोर्ट होगी जिन्हें विशेष तौर पर आयुर्वेद चिकित्सा के लिए के तैयार किया जाएगा। आयुर्विज्ञान और तकनीकB के साथ वैद्य मरीजों को परामर्श देंगे।
आयुर्टेक में यह होगा
- कम्प्यूटर विजन की मदद से आयुर्वेद सिद्धांतों के आधार पर मरीज का परीक्षण।
- डिजिटल सेंसिंग से मरीज की बीमारी और दवाई के असर का पता लगाना।
- आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से डिवाइस बनाना।
- जीन आधारित उपकरण तैयार करना, जिससे आयुर्वेद में लिखित बीमारी को जीन से जोड़कर कम समय में इलाज किया जाए।
10 अरब डॉलर का है कारोबार
कोविड काल के बाद पूरे विश्व में आयुर्वेद की मान्यता काफी बढ़ गई है। वर्तमान में आयुर्वेद का कारोबार दस अरब डॉलर है जिसके अगले 20 साल में 100 अरब डॉलर पहुंचने की संभावना है।
"आयुर्टेक में आयुर्वेद के सिद्धांत के अनुरुप इलाज के लिए व्यक्तिगत व बचावात्मक तकनीकB विकसित की जाएगी, जिससे इलाज में एक्यूरेसी व तेजी आएगी। जीन के स्तर पर भी आयुर्वेद का इलाज मान्य हो जाएगा।"
-प्रो अभिमन्यु सिंह, कुलपति, डॉ एसआरएस राजस्थान आयुर्वेद विवि जोधपुर
Published on:
02 Mar 2022 12:12 pm
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