गंगा किनारे पहुंचा ‘रामजी का घोड़ा’

locust news

- हर रोज आ रही है 2 से 2.50 करोड़ टिड्डी
- पाकिस्तान से पिछले 55 दिन में 55 टिड्डी दल घुसे

By: Gajendrasingh Dahiya

Published: 26 Jun 2020, 07:50 PM IST


जोधपुर. टिड्डी अब गंगा के किनारे पहुंच गई है। उत्तरप्रदेश के वाराणसी में टिड्डी पहुंचने के बाद सरकार के ललाट पर चिंता की लकीरें खिंच गई। स्थानीय लोग कौतुअल के साथ सहम गए। वर्ष 1962 के बाद यह पहला मौका है जब टिड्डी गंगा तट तक गई है। प्रयागराज के अलावा चित्रकूट और जौनपुर में भी टिड्डी ने उत्पात मचाया।
पिछले 55 दिन में पाकिस्तान से 55 टिड्डी दल भारत में घुसे हैं। औसतन टिड्डी दल का आकार तीन किलोमीटर लंबा और 1 किलोमीटर चौड़ा है। प्रत्येक दल के साथ 2 से 2.50 करोड़ टिड्डी आ रही है। 55वां टिड्डी दल 24 जून को बाड़मेर के रास्ते घुसा था। एक सप्ताह में तीन बड़े टिड्डी दल आ चुके हैं। बाड़मेर से पहले श्रीगंगानगर और फिर बीकानेर से घुसा था यानी राजस्थान की श्रीगंगानगर से लेकर जैसलमेर तक पूरा बॉर्डर टिड्डी प्रवेश के लिए अनुकूल बना हुआ है। मानसून की बरसात शुरू होने के साथ ही अब बड़े टिड्डी हमले बढ़ेंगे।

राजस्थान के साथ यूपी में ऑपरेशन टिड्डी
राजस्थान के अलावा शुक्रवार को उत्तरप्रदेश में टिड्डी नियंत्रण कार्यक्रम चलाया गया। जैसलमेर के डेलासर, सुजासर, खेतोलाई, बाड़मेर के शोभावास, मेवानगर, रावली की ढाणी, कल्याणपुर, बिशाला रोड, जोधपुर के हरलाई, थडिय़ा, बनियों की ढाणी, बीकानेर के धरनोक, बामनसर, सीकर के लामिया, नागौर के खेतलाई नाडी, सादलपुरा, शिवपुरा, नागाड़ी, जयपुर के रामसिंह पुरा, चकवाडा, झुंझनूं के बिशनपुरा में ऑपरेशन किया गया। उत्तरप्रदेश में चित्रकूट जिले के घरसेड़ा, सरिया, वाराणसी के राजपुर नाम स्थान पर टिड्डी पर पेस्टीसाइड स्प्रे किया गया।

मानसून ने बढ़ाई चिंता
मानसून शुक्रवार को पूरे देश में छा गया और पश्चिमी हिस्से को पार करके पाकिस्तान में प्रवेश कर गया। मानसून के आने से अब टिड्डी के तेजी से प्रजनन की आशंका बढ़ गई है।

Gajendrasingh Dahiya Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned