रजिस्ट्रेशन पर्ची, चिकित्सक परामर्श, ब्लड सैम्पल देने व नि:शुल्क काउंटर से दवा लेने तक कतार ही कतार, सर्दी में मरीज परेशान

कतार का दर्द : एमडीएम अस्पताल में कम नहीं हो रही कतार की परेशानी, सर्दी के समय कतार में खड़े रहने से ठिठुरते रहते हैं मरीज

 

By: Harshwardhan bhati

Published: 18 Dec 2018, 01:59 PM IST

कानाराम मुंडियार/जोधपुर. संभाग के सबसे बड़े मथुरादास माथुर अस्पताल में चिकित्सक से परामर्श लेना है तो आपको घंटों तक कतार में खड़े रहकर कड़ाके की सर्दी में धूजना पड़ेगा। सबसे पहले रजिस्ट्रेशन पर्ची लेने के लिए कतार में लगना पड़ेगा और उसके बाद चिकित्सक से परामर्श वाली कतार में खड़ा होना पड़ेगा। और लम्बे इंतजार बाद यदि आपने यह स्टेप पूरा कर लिया तो अगला स्टेप परामर्श पर्ची पर नम्बर लगवाकर ब्लड जांच के लिए सैम्पल देने और नि:शुल्क दवा के लिए कतार का दर्द झेलना ही पड़ेगा।

एमडीएम अस्पताल में ऐसी परेशानी लम्बे समय से हैं। अस्पताल का ओपीडी 4 हजार से 4500 के बीच रहता है। मौसम के बदलाव के साथ अस्पताल की ओपीडी बढ़ जाती है। सरकारी अवकाश के अगले दिन भी अस्पताल में मरीजों का लोड बढ़ जाता है। अस्पताल के न्यू ओपीडी में मरीज व उनके परिजन सुबह 7 बजे से ही कतार में लग जाते हैं। हृदय रोग विभाग में भी पहले आओ, पहले पाओ की व्यवस्था के कारण कई मरीज व उनके परिजन सुबह जल्दी आकर कतार में लगते हैं। ताकि समय पर नम्बर आ जाएं तो चिकित्सक से परामर्श ले सकें। अस्पताल प्रशासन को मरीजों के सुबह जल्दी आकर सर्दी में ठिठुरते हुए कतार में लगने की परेशानी दिखाई नहीं दे रही है।

बच्चे भी ठिठुरते हैं
अस्पताल में रजिस्ट्रेशन पर्ची व नि:शुल्क दवा काउंटरों के बाहर लगने वाली कतार में मरीज व उनके परिजन के साथ छोटे बच्चे भी होते हैं। जब तक कतार में नम्बर नहीं आ जाता है तब तक बच्चे भी फर्श पर इधर-उधर खेलते रहते हैं। सर्दी के समय बच्चों का इस तरह फर्श पर बैठे रहना या कतार के पास खड़े रहना बीमारियों के चपेट में आने का खतरा भी बना रहता है।

घर का काम छोड़ आती हैं महिलाएं
कतार में अपनी बारी का इंतजार कर रही महिलाओं ने बताया कि वे सुबह घर के सारे काम छोडकऱ अस्पताल आती है। और अस्पताल में रजिस्ट्रेशन पर्ची के लिए कतार के बाद लगातार तीन कतार में खड़े रहकर दोपहर तक परेशान होना पड़ रहा है। नि:शुल्क दवा काउंटरों पर दवा देने की गति बेहद धीमी होती है और वहां पर चिकित्सक की लिखी पूरी दवा भी नहीं मिलती। अस्पताल प्रशासन को महिलाओं की परेशानी को देखते हुए व्यवस्था में सुधार करना चाहिए।

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