
वेस्ट कपड़े की रस्सी से चारपाई बनाई, अब पूरे देश में धमाल मचा रही
जोधपुर।
दो युवा, उनमें से एक की उम्र महज 19 साल। करीब डेढ़ साल अपने दोनों ने हाथ में हैंडीक्राफ्ट का काम शुरू किया। वेस्ट कपड़े और साड़ी को गूंथ कर रस्सी बनाई और उसी से ग्रामीण कल्चर साकार किया। चारपाई बनाई और उसका ऑनलाइन मार्केट तैयार किया। लोगों को इतनी पसंद आई कि मात्र डेढ़ साल में ही दोनों ने इसका टर्नओवर एक करोड़ के पार पहुंचा दिया। अब कई फिल्मी सितारे और देश के नामचीन लोग इनसे जुड़ चुके हैं।
ऐसे आई सोच
दोनों युवाओं ने एक साथ हैंडीक्राफ्ट की कंपनी में काम शुरू किया। कुछ माह बाद ही अपना खुद का अलग काम करने की सोची। काफी रिसर्च किया और उसके बाद गांवों की संस्कृति को फिर से जीवंत करने की ठानी। चारपाई की बुनाई शुरू की। ऑनलाइन मार्केट शुरू किया और देखते ही देखते लोगों की डिमांड आने लगी। इसके बाद काम चल निकला।
कुछ चुनौतियां भी
कोरोना का दौर था तो कई चुनौतियां थी। लेकिन ऑनलाइन मार्केट तैयार किया तो देशभर से ऑर्डर आने लगे। स्थानीय स्तर पर इतना रेस्पॉस नहीं था। लेकिन बॉलीवुड स्टार व कई सिंगर्स के साथ सेलिब्रिटीज ने इसके ऑर्डर दिए तो इनका हौसला काफी बढ़ गया।
रिसाइकिल प्रोडक्ट पर जोर
इन्होंने चारपाइ के लिए जो रस्सी चुनी वह पुराने कपड़ों व साडिय़ों को गूंथ कर बनाई जाती है। ऐसे में कस्टमर्स को यह कॉन्सेप्ट भी अच्छा लगा। हालांकि अब डिमांड के अनुसार सूत व जूट की रस्सी की चारपाइयां भी बनाई जाती है। चारपाई के साथ बुनाई के स्कूल, टेबल व अन्य फर्नीचर आइटम भी ये युवा तैयार करते हैं।
पहले घर से ही चलाया
हिमांशु अग्रवाल बताते हैं कि डेढ़ साल पहले काम शुरू किया। पहले छह माह घर से ही काम किया। खुद बुनाई करते और पैकिंग भी खुद ही करते थे। जब डिमांड अच्छी आने लगी तो फैक्ट्री लगाई। अब तमिलनाडु, महाराष्ट्र सहित दक्षिण भारत के कई राज्यों से डिमांड आ रही है।
सस्टेनेबल प्रोडक्ट है रस्सी
मयंक मालू जो कि महज 19 वर्ष के हैं बताते हैं कि साड़ी के कुछ बचे पार्ट से रस्सी बनी है। जिससे हमारी चारपाई या अन्य प्रोडक्ट की उम्र 10 से 15 साल तक रहती है। इसका अच्छा रेस्पॉस आ रहा है। हम वेस्ट को काम में लेते हैं और पर्यावरण संरक्षण भी करें।
Published on:
29 Aug 2021 09:14 pm
