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18 साल बाद फिर जिला परिषद में मदेरणा राज

अब तक सर्वाधिक कांग्रेस ने किया जिला प्रमुख सीट पर कब्जा

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18 साल बाद फिर जिला परिषद में मदेरणा राज

18 साल बाद फिर जिला परिषद में मदेरणा राज

राजेश दीक्षित

जोधपुर. जोधपुर जिला परिषद में एक बार फिर मदेरणा राज हो गया है। इसके लिए मदेरणा परिवार को लम्बा इंतजार करना पड़ा। इसे एक संयोग भी कह सकते हैं कि कांग्रेस के दिग्गज नेता स्व. परसराम मदेरणा के पुत्र महिपाल मदेरणा करीब 18 साल तक जिला प्रमुख रहे और अब करीब 18 साल बाद ही उनकी पत्नी लीला मदेरणा क्रॉस वोटिंग की आशंका को निर्मूल साबित कर सोमवार को जिला प्रमुख चुनी गई। हालांकि इसके लिए उन्हें पूर्ण बहुमत होने के बाद भी अपनी ही पार्टी में कड़ी चुनौती झेलनी पड़ी। परिणाम घोषित होने तक असमंजस की स्थिति बनी रही।
राजस्थान में पंचायत चुनाव सबसे पहले 1960 में हुए थे। जोधपुर में सबसे पहले कांग्रेस के खेतसिंह राठौड़ ने जिला प्रमुख की कमान संभाली। इसके बाद लम्बे समय तक महिपाल मदेरणा 1982 से 2003 तक जिला प्रमुख बने रहे। हालांकि इस दौरान जिला परिषद में पांच साल तक प्रशासक भी नियुक्त रहा। महिपाल के बाद हालांकि लीला मदेरणा जिला परिषद की सदस्य बनती रहीं, लेकिन जिला प्रमुख नहीं बन पाई।

वर्ष 2003 से 2015 तक दो बार भाजपा ने जिला प्रमुख की सीट पर कब्जा किया। इसमें 2005 में अमिता चौधरी तो 2015 में पूनाराम चौधरी भाजपा से जिला प्रमुख बने। वर्ष 2005 में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत के बावजूद लीला मदेरणा जिला प्रमुख नहीं बन पाई। इस चुनाव में कांग्रेस की क्रॉस वोटिंग से भाजपा की अमिता चौधरी जिला प्रमुख बन गईं।
इस बार के चुनाव में शुरू से ही कांग्रेस से जिला प्रमुख का मुख्य दावेदार लीला मदेरणा को ही माना जा रहा था, लेकिन पूर्व सांसद बद्रीराम जाखड़ की बेटी मुन्नीदेवी गोदारा की चुनौती आ खड़ी हुई। मुन्नीदेवी ने निर्दलीय के रूप में परचा भर दिया और वापस भी नहीं ले सकी तो क्रॉस वोटिंग की आशंका बलवती हो गई, लेकिन आखिर कांग्रेस नेताओं ने सुलह करवा ली और 18 साल बाद फिर मदेरणा परिवार जिला प्रमुख की सीट पर काबिज हो गया।

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