
जोधपुर का महाराष्ट्र समाज इस बार भी निभाएगा 115 साल पुरानी परम्परा
नंदकिशोर सारस्वत
जोधपुर. गणपति उत्सव का श्रीगणेश जोधपुर में 115 साल पहले 1905 में महाराष्ट्र मूल के कुछ लोगों ने शहर में इॅको फ्रेंडली गणपति मूर्ति स्थापित कर किया था। जोधपुर के रेलवे अधिकारी फाटेक साहेब ने 1905 में सिवांचीगेट शिवदत्त गढ़ी परिसर में दत्त भगवान और गणेश जी की मूर्ति स्थापित कर गणपति महोत्सव की शुरुआत की जिसकी परम्परा इस बार भी सोशल डिस्टेंसिंग और जिला प्रशासन की गाइडलाइन के अनुरूप निभाई जाएगी। इॅको फ्रेंडली प्रतिमा इस बार मुंबई से मंगवाई जा रही है। महाराष्ट्र समाज के सचिव अजय सोहोनी ने बताया की इस बार समाज की ओर से रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम व नाट्य समारोह नहीं होगा लेकिन सुबह शाम सीमित सदस्यों की मौजूदगी में आरती की जाएगी। समाज के बुजुर्गों और बच्चों के लिए फेस बुक लाइव से दर्शन करवाए जाने की व्यवस्था की जाएगी।
1963 से लगातार महाराष्ट्र भवन में होता है उत्सव
महाराष्ट्र समाज की ओर से गणपति महोत्सव जसवंत सराय, राजरणछोड़दास मंदिर और सरदारपुरा की एक निजी स्कूल परिसर में होता रहा लेकिन वर्ष 1963 में शास्त्रीनगर डी सेक्टर में महाराष्ट्र समाज भवन का निर्माण होने के बाद समाज की ओर से सार्वजनिक गणपति उत्सव हर साल वहीं पर आयोजित होता है ।
ऐसे हुआ था महाराष्ट्रीयन परिवारों का आगमन
जोधपुर में महाराष्ट्रीयन परिवारों का आगमन 19 वीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में शुरू हुआ। उस समय कराची सिंध मेल वाया जोधपुर होते हुए आरंभ हुई तो जोधपुर मिडवे के रूप स्थापित हुआ और रेलकर्मियों के रूप में महाराष्ट्रीयन परिवारों का जोधपुर आगमन शुरू हुआ। जोधपुर में महाराष्ट्र समाज की ओर से गणेशोत्सव में जोधपुर में निवासरत लोग पूरे परिवार सहित शामिल होते है लेकिन इस बार वैश्विक महामारी के कारण ऐसा नहीं हो पाएगा।
Updated on:
17 Aug 2020 11:43 pm
Published on:
17 Aug 2020 11:43 pm
