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Mahatma Gandhi Martyrdom Day : अंग्रेजों ने गांधी को जोधपुर आने से रोका, आज शहर में हर जगह गांधी

जोधपुर ( jodhpur news.current news ) . राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ( Mahatma Gandhi ) अपने दौरे के दौरान सन 1943 में टे्रन से जोधपुर के लिए रवाना हुए थे, लेकिन अंग्रेजों के दबाव के कारण उन्हें जोधपुर तक नहीं आने दिया गया। उन्हें लूणी में ही रोक दिया गया था। महात्मा गांधी शहादत दिवस ( Mahatma Gandhi Martyrdom Day ) पर आज अगर हम देखें तो पाएंगे कि बापू ( bapoo ) साक्षात जोधपुर नहीं आ सके तो क्या हुआ, शहर में आज हर तरफ गांधी ( Mahatma Gandhi latest news ) विचार जिंदा है ( NRI news in hindi ) ।      
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जोधपुर

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MI Zahir

Jan 29, 2020

Mahatma Gandhi Martyrdom Day : Today Gandhi is everywhere in the jodhpur

Mahatma Gandhi Martyrdom Day : Today Gandhi is everywhere in the jodhpur

एम आई जाहिर / जोधपुर ( jodhpur news.current news ). राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ( Mahatma Gandhi ) अपने दौरे के दौरान सन 1943 में टे्रन से जोधपुर के लिए रवाना हुए थे, लेकिन अंग्रेजों के दबाव के कारण उन्हें जोधपुर तक नहीं आने दिया गया। उन्हें लूणी में ही रोक दिया गया था। जोधपुर के स्वतंत्रता सैनानियों और कांग्रेस के नेताओं ने उन स ( Mahatma Gandhi Martyrdom Day ) वहीं मुलाकात थी। यह बात राजस्थान के प्रख्यात संगीत निर्देशक स्व. पंडित ब्रजलाल वर्मा ने बताई थी। दिन महीने साल बीते, मगर गांधी विचार का प्रवाह नहीं रुका। आज का जोधपुर उस गांधीवाद से लबालब है। यह अंग्रेजों की उस सोच की हार और जोधपुर के बाशिंदों की सोच की जीत है। जोधपुर ने अपने माथे पर लगा बापू के जोधपुर में न आ पाने के दर्द को शिद्दत से महसूस किया और उन्हें हर तरह से याद रखा। गांधी विचार का प्रवाह सतत जारी है। हाल ही में शहर के चार हजार बच्चे गांधी का मुखौटा पहने हुए नजर आए थे। वहीं जोधपुर के पवन पारीक ने जयपुर में गांधी म्युजियम बनवाया है। बहरहाल आज गांधी जोधपुर में हर जगह हर रूप में मौजूद हैं ( NRI news in hindi ) ।

भावुक साहब और बंधु जी ने जिंदा रखे गांधी विचार
महात्मा गांधी के विचार और व्यवहार के प्रचार प्रसार में जोधपुर शहर बहुत अग्रणी रहा हैै। यहां साबरमती आश्रम, चम्पारण और गोपुरी वर्धा की तरह कोई आश्रम नहीं रहा, उसके बावजूद खूब गांधी विचार हिलोरें लेता रहा और विचारों और आचरण का प्रचार करने वाले व्यक्ति इतने मजबूत रहे कि उन्होंने अपना भवन होने की फिक्र न करते हुए उनके विचारों का प्रचार किया। इनमें सर्वोदयी व गांधीवादी नेमिचंद्र जैन भावुक ( Nemichandra jain Bhawuk ) और उमाशंकर त्रिपाठी बंधु जी ( Umashaker Tripathi bandhuji ) का अभूतपूर्व योगदान रहा। अहिंसा और सादगी के साथ सदभावना, शिक्षा और साहित्य को जोड़ते हुए दोनों ने मारवाड़ को दशा और दिशा देने में अहम योगदान दिया। बंधु जी ने बाल निकेतन जैसी संस्कार पाठशाला शुरू की तो भावुक साहब ने विनोबा भावे के भू दान ग्राम दान आंदोलन के समय सन 1956 में गांधी अध्ययन केंद्र की स्थापना की। दोनों हजारों लोगों के सादगी, सद आचरण और व्यवहार का प्रशिक्षण केंद्र रहे। आज जोधपुर में महात्मा गांधी विद्यालय और गांधी मूक बधिर विद्यालय भी हैं।

मारवाड़ ने गांधी को भावुक की नजर से देखा
भावुक स्वयं सादगी के प्रतीक थे और उनके विचार, व्यवहार और सेवा भावना के कारण हजारों लोग उनसे जुड़े। उन्होंने सन 1966 में गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र नई दिल्ली से जुडऩे के बाद इसका नाम गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र जोधपुर हो गया। उसके बाद दशकों तक नई सड़क कालटैक्स पर किराये की एक इमारत में गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र संचालित कर मारवाड़ में गांधीवाद व सर्वोदय की अलख जगाई।

गहलोत ने निभाया गांधीवाद और शिष्य धर्म
भावुक के शिष्य मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गांधी विचारों का प्रचार प्रसार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने गांधीवाद को सेवा और सत्ता दोनों में निभाया। बरसों पहले एक ओर वे केंद्र के कार्यकर्ता के रूप में बांग्लादेश के नागरिकों के लिए एक आम आदमी की तरह राहत सामग्री जुटाते हुए दिखाई दिए तो जनप्रतिनिधि रहते हुए राजनीति में भी गांधीवाद और शिष्य धर्म निभाया। मुख्यमंत्री रहते हुए सरकारी योजनाओं के साथ मदिरा के खिलाफ कड़े कदम उठाए तो सरकारी जटिलताओं में उलझा गांधी भवन भावुक के जीवन में ही गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र को दिलवा कर उनका सपना पूरा किया। गहलोत बाद में भी भवन की सुध लेते रहे। आज भी जुडे़ हुए हैं।

जोधपुर में गांधी भवन: फैक्टफाइल
लोकेशन : रेजीडेंसी रोडजमीन : 8000 वर्ग मीटर
सरकार ने भावुक को सौंपा : 2 अक्टूबर 2002
गांधी भवन में क्या क्या : पुस्तकालय,वाचनालय, कक्ष व सभागार
गांधी चित्र प्रदर्शनी: गांधी भवन सभागार में 100 से ज्यादा चित्र
मुख्य भवन की विशेषता : कमलनुमा आकार में बना है। आरसीसी की बनी यह इमारत शानदार आर्किटेक्ट की खूबसूरत मिसाल है। इसमें एक भी पिलर नहीं है।

गांधी भवन की गतिविधियां :
सभागार में गांधीवाद और साहित्य के कार्यक्रम करवाना।भावुक की संस्था अंतर प्रांतीय कुमार साहित्य परिषद का संचालन। सर्वोदय विचार परीक्षा करवाना,सर्वोदय साहित्य सस्ती दरों पर उपलब्ध करवाना। एसएन सुब्बाराव के सहयोग से एनएसएस के सेवा व सदभावना शिविर लगाना। महापुरुषों और महान साहित्यकारों की जयंती और पुण्य तिथि पर कार्यक्रमों का आयोजन। बुक बैंक के माध्यम से विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए पुस्तकें उपलब्ध करवा करवाना।

जोधपुर में बापू की प्रतिमाएं
जोधपुर शहर में महात्मा गांधी की कई प्रतिमाएं लगी हुई हैं। मसूरिया स्थित गांधी कुष्ठ आश्रम के पास 2 अक्टूबर को 1980 को नगर सुधार न्यास के तत्कालीन सचिव मख्तूरमल सिंघवी ने महात्मा गांधी की सबसे छोटी प्रतिमा की पुनस्र्थापना की थी। मेडिकल कॉलेज के बाहर 13 मई 2008 में महात्मा गांधी की आदमकद प्रतिमा की स्थापना की गई थी। शहर के कबूतरों का चौक स्थित बापू की प्रतिमा सबसे पुरानी है। यह प्रतिमा स्थानीय निवासी मदनलाल पुरोहित ने सन 1957 में स्वयं इसकी स्थापित की थी। शहर के दल्ले खां की चक्की स्थित सजी धजी प्रतिमा में महात्मा गांधी छतरी व चश्मा लगाए हुए दिखाई दे रहे हैं और उनके साथ बुराई से दूर रहने का संदेश देने वाले उनके तीन बंदर भी हैं। महात्मा गांधी चिकित्सालय में सन 1959 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने प्रतिमा का अनावरण किया था। यह प्रतिमा मूर्तिकार गोपीचंद बी मिश्रा ने बनाई और आनंदसिंह कच्छवाह ने भेंट की थी। महात्मा गांधी सीनियर सैकंडरी विद्यालय में 2 अक्टूबर 1969 में तत्कालीन वित्त मंत्री मथुरादास माथुर ने गांधी प्रतिमा का उद्घाटन किया था। देवनगर के निवासियों ने गांधी कुष्ठाश्रम में 2 अक्टूबर 2019 को महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित करवाई थी।

बापू का प्रिय भजन राजस्थानी में
बापू की आत्मकथा का 'गांधी जी री आत्म कथा' नाम से राजस्थानी में अनुवाद करने वाले राजस्थानी के प्रख्यात साहित्यकार आईदानसिंह भाटी ने नरसी मेहता ( Narsi Mehta ) के गुजराती में लिखे बापू के प्रिय भजन 'वैष्ण जनतो' का भी राजस्थानी में अनुवाद किया है। इस भजन का यह पहला राजस्थानी अनुवाद है :

वैष्णव जन तो उणनै कहिजै जे पीड़ पराई जाणै रे,
परदुखां उपकार करै तोई, मन अभिमान न आणै रे।।
सकळ लोक में सबनै बंदै, निंदा न करै किणरी रे।
वाच काछ मन निश्चळ राखै,धन धन जननी उणरी रे।।
सम दीठा नै तिरसणा त्यागै, पर नारी जांणै मात रे।
जीबां थकै कूड़ नीं बोलै, पर धन न झालै हाथ रे ।।
मोह माया व्यापै नी जिणनै, द्रिढ वैराग जिण रै मन में रे।
राम नाम सूं लिलवा लागी, सकळ तीरथ तिण रै तन में रे।।
बिना लोभ रे, बिना कपट छै, काम क्रोध निरवाळा रे।
भणै नरसैंयो तिणरा दरसण करतां कुळ इकोतर तारिया रे।।
-डॉ. आईदानसिंह भाटी ( Dr Aaidansingh Bhati )
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शहर के युवाओं के दिल में हैं गांधी
गांधी को लोगों तक पहुंचाने में भावुक साहब और बंधुजी दोनों का बड़ा योगदान है। आज गांधी शहर के असंख्य युवाओं के दिल में बसते हैं। इन युवाओं ने गांधी को अपनाया और गांधी विचारों को आत्मसात किया है।
-डॅा.कविता शर्मा ( kavita shrama )

स्वतंत्रता पूर्व हिन्दी के कवियों पर गांधी का प्रभाव विषय पर पीएचडी करने वाली गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र की सदस्य