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जोधपुर। परमवीर चक्र विजेता शहीद मेजर शैतान सिंह की 55 वी पुण्यतिथि शनिवार को मनाई गई। यहां पावटा चौराहा स्थित शहीद मेजर शैतान सिंह की प्रतिमा पर सेना और प्रशासन के अधिकारियों ने श्रद्धांजलि दी। जवानों ने कार्यक्रम में बिगुल की ध्वनियों के साथ दिवंगत मेजर को सलामी दी। इस मौके पर मेजर के कार्यों को याद किया गया। शहीद मेजर शैतान सिंह 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। मेजर ने वीरगति को प्राप्त होने से पहले कई चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था उनकी वीरता और बहादुरी को देखते हुए सरकार ने उन्हें परमवीर चक्र से नवाजा।
मेजर का जीवन परिचय
एक दिसम्बर १९२४ को जोधपुर में जन्मे मेजर शैतानसिंह को वीरता और बहादुरी पिता लेफ्टिनेंट कर्नल हेमसिंह भाटी से विरासत में मिली थी। वर्ष १९६२ के भारत-चीन युद्ध में १३ वीं कुमाऊं बटालियन से युद्ध का नेतृत्व करने वाले मेजर शैतानसिंह जम्मू कश्मीर के चुसुल सेक्टर के रेजंगला पर मोर्चा संभाल रहे थे। इस क्षेत्र को जवानों की तीन ट्रुप गार्ड कर रही थी। इन्हीं में थे मेजर शैतानसिंह भाटी जो एक ट्रुप से दूसरे ट्रुप को निर्देशित कर रहे थे। उनके निर्देशन व प्रोत्साहन से भारतीय जवानों ने बड़ी संख्या में चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतार और कई घंटों तक बमबारी के बावजूद शौर्य का परिचय दिया। इस युद्ध में कुमाऊं बटालियन के १०९ जवान शहीद हुए थे। मोर्चा संभालते हुए मेजर शैतानसिंह की देह बर्फबारी से जम गई थी, लेकिन उनके हाथ से बंदूक नहीं छूटी।
जरा याद करो कुर्बानी
आपको बता दें कि गीतकार प्रदीप द्वारा लिखा गया देशप्रेम से ओतप्रोत गीत जिसे लता मंगेशकर ने गाकर अमर कर दिया था दरअसल वो रेजांगला युद्ध और मेजर शैतान सिंह को ध्यान में ही रखकर रचा गया था। गीत के बोल कुछ यूं हैं थी खून से लथपथ काया, फिर भी बंदूक उठाके दस-दस को एक एक ने मारा, फिर गिर गए होश गंवा के, जब अंत समय आया तो कह गए के अब मरते हैं खुश रहना देश के प्यारों अब हम तो सफर करते हैं, क्या लोग थे वो दीवाने क्या लोग थे वे अभिमानी जो शहीद हुए हैं उनकी जरा याद करो कुर्बानी...
Published on:
18 Nov 2017 02:50 pm
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