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जोधपुर. मूलत: जोधपुर निवासी जयपुर में चाय का व्यापार करने वाले सुखपालचंद मेहता की आत्महत्या सूदखोरों के आतंक की कहानी बयां करती है। पिछले 17 साल से जयपुर में चाय का व्यापार करने वाले मेहता ब्याजखोरों से इस कदर परेशान थे कि पिछले 16 साल से वे ब्याज उतारने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन उनके बिछाए जाल में फंसते जा रहे थे। अपने दो पेज के सुसाइड नोट में उन्होंने अपने संघर्ष और ब्याजखोरों के दहशत की पूरी दास्तां लिखी। सुखपालचंद जोधपुर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रसन्नचंद मेहता के भाई थे।
अपने बेटे शिवांत को लिखे पत्र में उन्होंने बताया कि वह वर्ष 2002 से सूदखोरों से जूझ रहे हैं। पारिवारिक व्यापार की जयपुर देनदारी और 97 लाख का कर्ज चुकाना उनके लिए चुनौती बन गया। पहले वह 10 लाख रुपए सालाना का ब्याज चुकाते थे। इस ब्याज को कम करने के लिए बहुत कोशिश की लेकिन ब्याज बढ़ता हुआ तीन गुना तक पहुंच गया। इसके बाद उन्हें साढ़े तीन लाख रुपए प्रतिमाह का ब्याज चुकाना पड़ा। शेयर बाजार और व्यापार में नुकसान के बाद 50 लाख रुपए की देनदारी हो गई। सूदखोरों के बार-बार धमकाने पर उन्हें जयपुर छोड़ कर जाना पड़ा।
एक बार तो परिवारवालों ने बचा लिया
मेहता जब व्यापार में डूब गए तो उन्हें एकबारगी तो उनके परिवार के सदस्यों ने बचा लिया। बाद में उन पर 2 करोड़ रुपए का कर्जा हो गया। जिसे चुकाने में समर्थ नहीं थे और प्रोपर्टी भी इतनी नहीं थी कि उसे बेच कर उधारी चुकाई जा सके। चाय का भी जिक्र किया गया। जिससे लाभ होने की उम्मीद थी। लेकिन लगातार बढ़ते ब्याज ने उनको फिर 50 लाख रुपए के कर्ज तले दबा दिया।
एक बार बेटे के कहने पर लौट आए थे
मेहता एक बार पहले भी सूदखोरों के भारी दबाव के कारण घर छोड़ कर चले गए थे, तब बेटे और परिवार के लोगों के समझाने पर वापस आए। कई लोगों से मदद मांगी और सूदखोरों से मोहलत लेकिन लोगों का धमकाना लगातार जारी रहा।
दर्शन के लिए कह कर गया था
हमें गुरु महाराज के दर्शन के लिए कह कर गया था। पता नहीं था ऐसा कदम उठाएगा। सूदखोरों की पूरी कहानी उसके साथ ही चली गई।
- प्रसन्नचंद मेहता, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष और मृतक के भाई
Published on:
06 Jul 2018 11:29 am
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