
जोधपुर.अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शाइर व आलोचक शीन काफ निजाम ने कहा कि मन्टो हकीकतपसंद थे। हर हकीकतपसंद तरक्कीपसंद हो, यह जरूरी नहीं है, लेकिन हर तरक्कीपसंद हकीकतपसंद जरूर होता है। वे साहित्यिक संस्था तहज़ीब की ओर से आओ बात करें कार्यक्रम के तहत महिला पी.जी.महाविद्यालय के आर.पी.व्यास स्मृति सभागार में आयोजित उर्दू के मशहूर अफसानानिगार सआदत हसन मन्टो के अफसानों और मन्टो की भाषा के बारे में उद्बोधन दे रहे थे।
मन्टो के किरदार समाज के मुहावरे का हिस्सा
उन्होंने कहा कि मन्टो ने अपने अफसानो में इस तरह किरदारसाजी की है कि उनके रचे गए किरदार समाज के मुहावरे का हिस्सा बन गए। निजाम ने अफसाने की भाषा और बुनावट पर सवाल करते हुए कहा कि काली शलवार का रूपक धर्म है, रस्म है या अधिकार है। मन्टो के दो अफसानों काली शलवार और बाबू गोपीनाथ का शीन मीम हनीफ, डॉ.कालूराम परिहार, नवनीत नीरव और इश्राकुल इस्लाम माहिर ने समालोचनात्मक विश्लेषण किया। सवालों और विचारों की अभिव्यक्ति में राकेश मूथा, रंग निर्देशक डॉ.एस.पी.रंगा, डॉ. हरीदास व्यास, डॉ. पद्मजा शर्मा, डॉ. निसार राही, उपासना, कैलाश कबीर, हबीब कैफी, छवि प्रताप, डॉ.जागृति उपाध्याय व अफज़ल जोधपुरी ने बातचीत में अपने विचार रखे। कार्यक्रम में मजाहिर सुल्तान जई, रामकिशोर फिड़ौदा, इस्हाक़ अहमद मुग़ल, शब्बीर हुसैन, प्रमोद वैष्णव, उम्मेद भाटी व मोहम्मद इमरान के साथ रंगकर्मी, साहित्यकार व विद्यार्थी मौजूद थे। अंत में उपाध्यक्ष वाजिद हसन काजी ने आभार व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि मन्टो पर पाकिस्तान में फिल्म बन चुकी है और हाल ही में भारत में निर्मित नंदितादास निर्देशित फिल्म मन्टो में अदाकार नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने मन्टो का किरदार निभाया है।