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PAPAYA—-मारवाड़ के लोग खाएंगे ताईवान के पपीते

- कृषि विवि तैयार कर रहा पपीते की 50 हजार पौध - मिठास ओर पोषक तत्वों के कारण विश्व प्रसिद्ध है ताइवान के पपीते
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जोधपुर

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Amit Dave

Jun 01, 2021

PAPAYA----मारवाड़ के लोग खाएंगे ताईवान के पपीते

PAPAYA----मारवाड़ के लोग खाएंगे ताईवान के पपीते

जोधपुर।

मारवाड़ के लोग अब ताईवान के पपीते खाएंगे। जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय ताईवान के पपीते उगा रहा है । विश्वविद्यालय ताईवान के पपीते की प्रसिद्ध मादा उभयलिंगी किस्म रेड लेडी-786 की करीब 50 हजार पौध तैयार कर रहा है। जो किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे। राज्य सरकार की राष्ट्रीय कृषि विकास योजना-2018 के तहत कृषि विश्वविद्यालय का प्रोजेक्ट 'शुष्क क्षेत्रों के फलों की आशाजनक किस्मों के गुणन के लिए मॉडल नर्सरी की स्थापनाÓ स्वीकार किया गया। प्रोजेक्ट के तहत विश्वविद्यालय में मॉडल नर्सरी की स्थापना कर पपीता तैयार किया जा रहा है।

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एक पौध से 40 फल

- इस किस्म के फल मीठे, स्वादिष्ट व पोषक तत्वों से भरपूर होते है।

- एक फल करीब 1.5 से 2 किलो का होता है।

- एक पौध एक सीजन में 35-40 फल उत्पन्न करती है।

- इसको पककर तैयार होने में 8-9 माह लगते है।

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पपीते की उपज बढ़ाना व किसानों को सुदृढ़ करना

इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य पश्चिमी राजस्थान में पपीता सहित अन्य फलों अनार, लसोड़ा, बेर, लाइम आदि फलों की उपज बढ़ाना है। साथ ही, यहां के किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए इस किस्म की पौध तैयार कर किसानों को उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने खेतों में यह किस्म उगा सके।

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पौधे में नर-मादा दोनों के गुण

ताईवान की किस्म रेड लेडी-786 मादा उभयलिंगी है। इसमें नर-मादा दोनों के गुण होते है। परागकण के लिए नर की जरुरत नहीं होती है। जबकि अन्य किस्मों में परागगण के लिए नर की जरुरत होती है, अन्यथा सभी नर पपीते ही उत्पन्न होते है। इसके लिए मारवाड़ की जलवायु, वातावरण, मिट्टी उपयुक्त है। साथ ही, जहां सिंचाई से पानी की सुविधा उपलब्ध हो, वहां इसकी खेती आसानी से की जा सकती है।

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अगस्त तक तैयार

नर्सरी में ताईवान के पपीते की रेड लेडी-786 किस्म तैयार कर रहे है। अगस्त माह तक तैयार हो जाएगी और किसानों को उपलब्ध करा दी जाएगी।

डॉ एमएल मेहरिया, फॉर्म इंचार्ज

कृषि अनुसंधान केन्द्र, मण्डोर