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जोधपुर में देवप्रबोधिनी एकादशी को तीन जगहों पर हुए सामूहिक विवाह
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जोधपुर में देवप्रबोधिनी एकादशी को तीन जगहों पर हुए सामूहिक विवाह

सामूहिक विवाह में दूल्हा दुल्हन ने थामा एक-दूसरे का हाथ
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जोधपुर. अबूझ सावे के रूप में मान्य देवप्रबोधिनी एकादशी को सूर्यनगरी में तीन समाजों के अलग अलग जगहों पर हुए सामूहिक विवाह के आयोजन के दौरान कुल 71 जोड़े अग्नि के समक्ष फेरे लेने के बाद जीवन साथी बने। करीब चार माह बाद सावों की धूम के चलते सूर्यनगरी मंगलवाद्य से गूंज उठी।

समस्त पीपा क्षत्रिय न्याति ट्रस्ट जोधपुर की ओर से १८ वें सामूहिक विवाह समारोह में २९ जोड़े परिणय सूत्र में बंधे। सामूहिक बारात अंध विद्यालय के सामने माता का थान से रवाना होकर विवाह स्थल मातुश्री फार्म हाउस पहुंचने पर अध्यक्ष प्रकाश चावड़ा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष कब्बुलाल दैया, पुखराज पंवार, तेजाराम राखेचा, गंगाराम चौहान, अशोक चावड़ा आदि न्याति कार्यकारिणी सदस्यों व पदाधिकारियों ने स्वागत किया। वरमाला समारोह के दौरान समूचा परिसर तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा। विवाह स्थल पर १८ वें तुलसी विवाह का भी आयोजन भी किया गया।

आदर्श जीनगर विकास समिति की ओर से आयोजित पंचम सामूहिक विवाह समारोह में ३० जोड़े शामिल हुए। प्रतापनगर शॉपिंग सेन्टर के पीछे गरबा पार्क में आयोजित सामूहिक विवाह आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में समाज के लोगों ने भाग लिया। पाणिग्रहण संस्कार आचार्य डॉ. रामनारायण शास्त्री के आचार्यात्व में होने के बाद शाम को सभी जोड़ों को विदाई दी गई।

घरों के कंवळे हुए रोशन, मंदिर भी जगमगाए
क्षीर सागर में सोए भगवान विष्णु जागने के दिवस देव उठनी ग्यारस के उपलक्ष्य में सावों के साथ घरों व मंदिरों में शालिग्राम संग तुलसी विवाह की भी धूम रही। तुलसी विवाह के लिए मंदिरों में गमले पर आकर्षक मांडणों की सजावट की गई। मेहंदी व सुहाग के प्रतीक चूडि़यों से दुल्हन तुलसी शृंगार कर मंगलगीतों के बीच वैदिक रीति रिवाज से पाणिग्रहण संस्कार पूरा किया गया। तुलसी विवाह समारोह का क्रम कार्तिक पूर्णिमा तक जारी रहेगा। शाम को घरों और मंदिरों के कंवळे रोशन किए गए। मंदिरों में ५६ भोग अन्नकूट महोत्सव की धूम रही।