scriptmedical device park can reduce dependence on foreign countries | विदेशों पर निर्भरता घटा सकता है हमारा मेडिकल डिवाइस पार्क | Patrika News

विदेशों पर निर्भरता घटा सकता है हमारा मेडिकल डिवाइस पार्क

- जोधपुर में होना है स्थापित, राज्य सरकार तेजी से बढ़ा रही है कदम

जोधपुर

Updated: October 29, 2021 09:51:14 pm

सुरेश व्यास/जोधपुर। कोरोनाकाल में मेडिकल उपकरणों की कमी से सबक लेने के बाद देश में स्थापित किए जा रहे चार मेडिकल डिवाइस पार्क कई मामलों में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं। ऐसा ही एक पार्क जोधपुर में स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। हालांकि इसके लिए केंद्र सरकार को भेजे गए प्रस्ताव को अभी मंजूरी नहीं मिली है, लेकिन राज्य सरकार ने अपने स्तर पर ही पार्क स्थापित करने की तैयारियों की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं। जानकारों का कहना है कि मेडिकल डिवाइस पार्क स्थापित करने का काम जितना तेजी से पूरा होगा, उतना ही जल्दी भारत की इस मामले में विदेशों पर निर्भरता घटेगी।
विदेशों पर निर्भरता घटा सकता है हमारा मेडिकल डिवाइस पार्क
विदेशों पर निर्भरता घटा सकता है हमारा मेडिकल डिवाइस पार्क
केंद्र सरकार ने कोरोनाकाल में ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर व अन्य जरूरी उपकरणों की कमी के मद्देनजर मेडिकल डिवाइस पार्क स्थापित करने का फैसला किया था। इसके अनुरूप रीको ने पिछले साल जुलाई में ही केंद्रीय रसायन व उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्यूटिकल विभाग को सहमति पत्र भेज दिया। जोधपुर के बोरानाडा में 233 एकड़ क्षेत्र में स्थापित होने वाले पार्क व कॉमन फैसिलिटी सेंटर के लिए 134 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति जारी की जा चुकी है। पार्क में पहले चरण में 73 इकाइयां लगेंगी। रीको ने आइआइटी जोधपुर से तकनीकी सहयोग के लिए एमओयू किया है। अब शीघ्र ही एम्स जोधपुर के साथ ही ऐसा एमओयू करने की तैयारी है। एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्रीज से भी तकनीकी सहयोग लिया जा रहा है।
आ सकता है 400 करोड़ तक का निवेश
जोधपुर में हालांकि अभी छोटे पैमाने पर मेडिकल डिवाइस बनाने की कुछ इकाइयां काम कर रही है, लेकिन यहां प्लास्टिक व मैटल वक्र्स की उपलब्धता के चलते हाईटैक उपकरण बनाने में भी मदद मिल सकती है। अंदाज लगाया जा रहा है कि जोधपुर के मेडिकल डिवाइस पार्क में लगभग 400 करोड़ का निवेश पहले चरण में हो सकता है।
मांग लगातार बढ़ रही
अब हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं तो नए अस्पताल भी बनेंगे। ऐसे में उपकरणों की मांग और बढ़ेगी। इस हिसाब से भी मेडिकल डिवाइस पार्क फायदे का सौदा हो सकते हैं। यदि योजनानुसार काम हो जाए तो संभावना ये भी है कि मेडिकल डिवाइस उत्पादन में भारत दुनिया का पांचवा बड़ा हब बन जाए।
यूं खत्म हो सकती है निर्भरता
जोधपुर में मेडिकल सीरिंज उत्पादन इकाई के संचालक वरिष्ठ उद्यमी एनके जैन बताते हैं कि अभी तो मेडिकल उपकरणों के मामले में विदेशों पर निर्भर हैं। करीब 80 फीसदी उपकरण अमरीका, जर्मनी, नीदरलैंड, चीन व सिंगापुर जैसे देशों से आयात होते हैं। जबकि क्लिनिकल व डिजिटल थर्मामीटर, सीरिंज, स्थेटोस्कॉप, ऑक्सीमीटर, ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर, कैथेटर्स व इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफ जैसे संस्ते व कम लागत वाले उपकरणों का उत्पादन यहां आसानी से हो सकता है। देश में पहले से मौजूद प्लास्टिक व मैटर वक्र्स इंडस्ट्री की मदद से मध्यम श्रेणी के इलेकट्रोसाइक्लोजी प्रोब व लीड वायर, डायग्नोसिस अल्ट्रासाउंट स्कैनर, डिस्पोजेबल स्मार्ट हैल्थ मॉनिटर, इम्पलांट व प्रोसथैटिक्स जैसे उपकरण बनाकर आयात पर निर्भरता कम की जा सकती है।

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