10 अगस्त 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

नारी चेतना का पर्याय है मीरां बाई

JNVU News - जेएनवीयू में व्याख्यानमला
less than 1 minute read
Google source verification
नारी चेतना का पर्याय है मीरां बाई

नारी चेतना का पर्याय है मीरां बाई

जोधपुर. जेएनवीयू के राजस्थानी विभाग द्वारा शनिवार को ऑनलाइन आयोजित सुविख्यात राजस्थानी कवयित्री भक्तिमति मीरां बाई व्याख्यानमाला को संबोधित करते हुए प्रोफेसर डॉ कल्याण सिंह शेखावत ने कहा कि भक्त शिरोमणी मीरा का व्यक्तित्व और कृतित्व अनूठा है। उन्होंने अपने समय में परम्परागत रूढियों का विरोध कर सम्पूर्ण विश्व में नारी चेतना की अलख जगाई।
राजस्थानी विभागाध्यक्ष डॉ मीनाक्षी बोराणा ने बताया कि व्याख्यानमाला का आयोजन कुलपति प्रो पीसी त्रिवेदी और अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. केएल. रैगर के सानिध्य में किया गया। राजस्थानी विद्वान डॉ. शेखावत ने मीरां बाई के प्रामाणिक पदों पर विस्तार से विवेचन करते हुए कहा कि वास्तव में वो एक सह्दय नारी और लोक नायिका थी जिन्होंने विषम परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारी और अपने आराध्य श्रीकृष्ण के प्रति अटूट आस्था तथा समर्पण भाव से राजस्थान को गौरवान्वित किया। नवधा भक्ति से परिपूर्ण मीरां बाई का काव्य राजस्थानी साहित्य जगत में अपना विशिष्ट स्थान रखता है । डॉ. शेखावत ने कहा कि भक्तशिरोमणी मीरां के पदों पर मानवीय द्रष्टि से शोध की महत्ती दरकार है। पूरी दुनिया में एक विराट व्यक्तित्व की पहचान रखने वाली मीरां को अपने ससुराल पक्ष से बहुत यातनाएं दी गई थी मगर उन्होंने उनकी परवाह किए बिना निडरतापूर्वक अपना जीवन जीया। डॉ. शेखावत ने कहा कि अपने देवर विक्रमादित्य के अत्याचारों से दु:खी होकर मीरां बाई ने उनको श्राप दिया था। हालांकि मेवाड़ की जनता ने तो मीरां को खूब मान सम्मान दिया मगर मेवाड़ राजघराने ने मीरां को सदैव अनदेखा ही किया।