
Meet the writer program of novelist and storyteller Dr. Deepti Kulshrestha
जोधपुर.मीरा पुरस्कार से सम्मानित उपन्यासकार व कहानीकार ( novelist and storyteller ) डॉ.दीप्ति कुलश्रेष्ठ ( Dr.Deepti Kulshrestha ) ने कहा कि समस्त ज्ञान मानव के लिए होने के कारण ज्ञान की विविध शाखाओं में परस्पर निर्भरता होना आवश्यक है। अत: मानव से सरोकार रखने वाले साहित्यकार के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह सभी विधाओं के सम्बंध में उस सीमा तक जानकारी रखे, जहां तक वे मानवीय संवेदना और सृजनशीलता को प्रभावित करती हैं।
वे अंतर प्रांतीय कुमार साहित्य परिषद ( Anter prantiya kumar sahitya parishad ) की मेजबानी में गांधी भवन में आयोजित लेखक से मिलिए ( meet the writer ) कार्यक्रम में साहित्य और मनोविज्ञान के विभिन्न आयाम और अंतर्सम्बन्ध विषयक शोध पत्र का वाचन कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि सर्जक और आलोचक दोनों के लिए साहित्य और इतर ज्ञानानुशासन के लिए विभिन्न ज्ञानानुशासन के परस्पर सम्बंध की समझ निहायत जरूरी हैं। इस मौके कुलश्रेष्ठ ने श्रोताओं के प्रश्नों के उत्तर भी दिए। परिषद के अध्यक्ष आचार्य मोहनकृष्ण बोहरा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि साहित्य में मनोविज्ञान के लिए भूमि उपलब्ध करवाई गई है। आचरणगत वैचित्र्य हमें साइकोलॉजी तक ले जाता है। कार्यक्रम का संयोजन महामंत्री डॉ पद्मजा शर्मा व संचालन युवा रचनाकार डॉ.वीणा चूंडावत ने किया। इस मौेके कई साहित्यकार मौजूद थे।
Updated on:
30 Sept 2019 09:14 pm
Published on:
30 Sept 2019 09:14 pm
