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पानी के मोल बिकने लगा दूध, 100 का चार लीटर

लॉकडाउन में दूध उत्पादकों पर चौतरफा मार
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पानी के मोल बिकने लगा दूध, 100 का चार लीटर

पानी के मोल बिकने लगा दूध, 100 का चार लीटर

जोधपुर. शहर के प्रमुख दूध के चौहटो में सुबह शाम करीब 50 से 60 हजार लीटर बिकने वाली दूध की खपत लगातार आधी से भी कम होने के कारण दूध अब मिनरल वॉटर बोटल के भाव में बिकने लगा है। लॉकडाउन में मिठाई की दुकानें, पर्यटन व्यवसाय, चाय की होटलें,लस्सी, आइसक्रीम, रेस्टोरेंट सभी बंद होने की वजह से दूध की मांग नहीं के बराबर है। सावों के सीजन के बावजूद कोविड गाइडलाइन के कारण सीमित सदस्यों की अनिवार्यता के चलते किसी तरह की मांग नहीं है। यही कारण है पिछले एक माह से 32 से 33 रुपए लीटर बिकने वाला दूध अब 25 रुपए तक बिकने लगा है। ग्रामीण क्षेत्रों से आ रहे दूध के भाव और भी कम है। गौपालक गौरीशंकर बोराणा ने बताया कि हमारी मजबूरी यह हैं कि भीषण गर्मी में दूध का भंडारण संभव नहीं है। और दूध फटने का डर होने के कारण औने पौने दामों में भी शहर के अलग अलग कॉलोनियों में बेचना मजबूरी है। खांडा फलसा दुग्ध उत्पादक समित के सचिव कैलाश पंवार ने बताया कि यदि महामारी न होती तो इस सावे के सीजन में दूध ज्यादा भाव में आसानी से बिक जाता लेकिन अब मांग कम होने से घटकर उपभोक्ता तक 25 रुपए लीटर तक पहुंचने पर भी बेचने में मुश्किलें हो रही है। दूध के भावों में भी कमी के साथ साथ अब गौपालकों को चारे व पशुआहार महंगा होने से तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। बोराणा ने जिला प्रशासन को चारे के डिपो पर पशु आहार बेचने की अनुमति देने का निवेदन किया है ताकि गौपालकों को कुछ राहत मिल सके।